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फोन कनेक्शन बढ़े पर कपड़ा उद्योग में मंदी

देश में बीते तीन महीनों (अगस्त-अक्तूबर) से लगातार करीब एक करोड़ फोन कनेक्शन लिए जा रहे हैं। इससे पहले कभी किसी महीने 70-80 लाख से अधिक लैंडलाइन और मोबाइल फोन कनेक्शन नहीं लिए गए। यानी कि देखते-देखते करीब 20 लाख फोन कनेक्शन अधिक लिए जाने लगे। एक गौर करने बात यह है कि इनमें से 0 प्रतिशत कनेक्शन मोबाइल के लिए गए। बाकी लैंडलाइन के। केन्द्रीय दूरसंचार मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने कहा कि मोबाइल फोन लेने वालों की रफ्तार ने जिस तरह की तेजी पकड़ी है, वह अपने आप में किसी रिकार्ड से कम नहीं है। सूत्रों का कहना है कि भारती एयरटेल, बीएसएनएल और रिलायंस कम्युनिकेशंस को सर्वाधिक कनेक्शन मिले हैं। उधर, सरकार वित्तीय तंत्र में पैसा उड़ेलने में जरूर लगी है लेकिन चिंताजनक बात यह है कि इस संकट ने अकेले टेक्सटाइल उद्योग में ही कम से कम छह लाख कामगरों की रोी-रोटी छीन ली है। विभिन्न प्रकार के संकटों से जूझ रहे कपड़ा उद्योग के जाने-माने विशेषज्ञों और कॉरपोरट हस्तियों ने संवाददाताओं के साथ बातचीत में साफ कहा कि इस वैश्विक संकट के चलते अकेले कपड़ा उद्योग में कम से कम 6 से 7 लाख कामगरों का रोगार समाप्त हो गया है। अपैरल निर्यात संवर्धन परिषद की प्रबंध समिति के सदस्य एच.के.एल.मगू के मुताबिक सरकार को ब्याज दरों में रियायत जारी रखने और ड्रा बैक दरों को फिर से पुराने स्तर पर लाने की दिशा में कदम उठाना चाहिये। वहीं, आपात स्थिति में खाद्य संकट की चुनौती से निपटने के लिए दक्षेस देशों ने एक फूड बैंक की स्थापना का निर्णय किया है। इस फूड बैंक में 243000 टन खाद्यान्न आपात स्थिति के लिए तैयार रखा जाएगा। फूड बैंक के लिए भारत ने सर्वाधिक 153000 टन खाद्यान्न देने का प्रस्ताव किया है। दक्षेस देशों के कृषि मंत्रियों के यहां चल रहे सम्मेलन में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी है। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा कि इस फूड बैंक में सबसे ज्यादा योगदान भारत की तरफ से दिया जाएगा। बाद में जरूरत पड़ने पर इसकी क्षमता को बढ़ाया भी जा सकता है।

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