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धरती के आकाश पर एक नया सितारा

बराक ओबामा की जीत अमेरिका (और उसके साथ पूरी दुनिया) में पिछली सदी में इराक युद्ध के साथ शुरू हुए अनिश्चय और अस्थिरता के युग के खात्मे का संकेत है। 2008 का साल पूरी दुनिया के लिए अमेरिका को लेकर एक अजीब अवसाद भरी विरक्ित का वर्ष था। और खुद अमेरिका के लिए वह घरलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर अपनी बढ़ती शक्ित शून्यता भोगने का साल था। सितम्बर में वॉलस्ट्रीट के हठात् हुए पतन ने उसके खोएपन के अहसास को और भी गहरा दिया। इस विचलन की भारी कीमत अमेरिका के साथ पूरी दुनिया चुकाती रही। ऐसे आत्यंतिक आघातों को झेल कर आज अमेरिका ने 10 में केनेडी के चयन के बाद एक युवा नेता को राष्ट्रपति पद सौंप दिया है। ऐसा नेता, जो अनुभव में तपा- तपाया उम्रदराज कूटनीतिज्ञ नहीं, जो किसी बड़ी कार्पोरट लॉबी या वजनी राजनैतिक वंश का प्रतिनिधि भी नहीं। बल्कि अमेरिका के एक सामान्य से अश्वेत अमेरिकी परिवार में जन्मा एक असाधारण रूप से आत्मविश्वासी और प्रतिभावान् व्यक्ित है। पहली बार, बिलकुल पहली बार उसने साबित किया है, कि आपात्काल की घड़ी में अमेरिका एकाुट हो अपने तमाम रंगवादी, नस्लवादी, पूर्वाग्रहों को दूर फेंक कर राष्ट्र-हित में मतदान कर सकता है। ओबामा को जिताने को अनायास उमड़ी हर वर्ग-वर्ण और उम्र के मतदाताओं की रिकार्डतोड़ भीड़ ने साबित किया है कि अपनी अंतरात्मा में अमेरिका सचमुच एक संयुक्त राष्ट्र है। जो जरूरत पड़ने पर अपने को पूरी तरह बदल सकता है। अब्राहम लिंकन और मार्टिन लूथर ने जिस मिश्रित न्यायपूर्ण और संघीय लोकतंत्र का सपना देखा था, विश्वपटल पर उसकी ठोस शुरुआत 2008 में एक सैंतालीस वर्षीय बराक हुसेन ओबामा जसे नाम वाले अश्वेत राष्ट्रपति की धमाकेदार जीत के साथ हो गई है।ड्ढr ड्ढr कुछ विघ्नसंतोषी खेमे डेमोक्रैट पार्टी की इस विशाल विजय के पीछे भारत-अमेरिका के बीच सुधरते रिश्तों के लिए एक खतर की घंटी बजती सुन सकते हैं, क्योंकि डेमोक्रैट पार्टी और ओबामा स्वयं भी, परमाणु नि:शस्त्रीकरण के पुराोर समर्थक तथा न्यूक-डील के आलोचक रहे हैं। काश्मीर को भी वे एक अंतर्राष्ट्रीय मसला मानते रहे हैं जिसमें हस्तक्षेप से उन्हें परहेा नहीं। लेकिन पत्ते खोलने से पहले ओबामा की आगामी नीतियों को लेकर ऐसी दुश्चिन्ता अभी अप्रासंगिक है। अधिक प्रासंगिक यह है, कि अमेरिका ने बरसों के बाद एक ऐसा नेता खोजा है, जो अपने चुनाव प्रचार के दौरान सार देश के श्वेत-अश्वेत, स्त्री- पुरुष, परंपरावादी और गैरपरंपरावादी मतदाताओं के मर्म को एक साथ स्पर्श कर सका है। अपनी विजय की घड़ी में ओबामा ने अपने संयत और विनम्र भाषण से एक बार फिर प्रभावित किया। अपने प्रतिद्वंद्वी मैक्केन के राष्ट्रहितों के प्रति दी कुर्बानियों की सराहना करते हुए ओबामा ने अपनी जीत की घड़ी में अमेरिकी जनता को अपने देश को मजबूती देने, सबको साथ लेकर चलने और सबकी (विशेषकर असहमति रखने वालों की) बात को गौर से सुनकर ही फैसला देने का आश्वासन दिया। उनका यह तेवर वयस्क और आश्वस्तिकारी है और हमार देश के कई बुजुर्ग, लेकिन आचरण में कतई अवयस्क और तोड़-फोड़ भरी राजनीति की वकालत करने वाले नेताओं के लिए भी ऐसी उदारता और संयम नोट करने योग्य है।ड्ढr ड्ढr यह समय बीती को पीछे रख कर नई शुरुआत को आगे बढ़ाने का है। ओबामा ने कहा है, कि अमेरिका के सामने खड़ी चुनौतियॉं विकट हैं, और राह दुर्गम। संभव है यह सब गुत्थियॉं एक कार्यकाल में सुलझाई न जा सकें। लेकिन यह एक नई शुरुआत की ऐसी शुरुआत है जिसमें वे सबको साथ लेकर बढ़ने और पारदर्शी निर्णय लेने के इच्छुक हैं। विश्व के सबसे महत्वपूर्ण लोकतंत्र में इस स्वस्थ युवा तेवरों वाली नई शुरुआत का अभिनंदन क्यों न किया जाए? और क्यों न लगे हाथों इन अमेरिकी चुनावों से खुद अपने देश के आगामी चुनावों के लिए भी स्वस्थ बदलाव के पक्ष में राष्ट्रीय एकाुटता रचने के लिए कुछ सबक भी ले लिए जाएं?

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  • Web Title: धरती के आकाश पर एक नया सितारा