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सारण संसदीय क्षेत्र : सारण की पुरानी पहचान कायम हुई

सारण को एक जमाने में सारण सरकार के नाम से जाना जाता था। सारण संसदीय क्षेत्र का नाम पहले छपरा था। नए परिसीमन में छपरा का नाम बदलकर सारण कर दिया गया। सारण के साथ पुरानी पहचान कायम हो गई है। सारण संसदीय क्षेत्र में मढ़ौरा, छपरा, गरखा अजा, अमनौर, परसा तथा सोनपुर विधानसभा क्षेत्र आते हैं। पुराने संसदीय क्षेत्र से तरैया को निकालकर उसके स्थान पर अमनौर को शामिल किया गया है। सारण जिले के दो विधानसभा क्षेत्रों -मशरख और जलालपुर का नाम क्रमश: एकमा और अमनौर हो गया है। जलालपुर का नगरा ब्लाक तथा रिविलगंज महाराजगंज का हिस्सा थे,अब सारण संसदीय क्षेत्र में शामिल हो गए हैं। सारण संसदीय सीट पर होने वाले आगामी चुनाव में राजद के लालू प्रसाद और भाजपा के राजीवप्रताप सिंह रूडी के बीच लड़ाई की संभावना है। 2004 में हुए चुनाव को रद्द कर दिया गया था। उसके बाद हुए चुनाव में राजद के लालू प्रसाद यादव ने भाजपा के राजीव प्रताप सिंह रूडी को 60,423 मतों से पराजित किया। श्री प्रसाद को 2,28,882 मत मिले और श्री रूडी को 1,68,45मत मिले। 2004 के चुनाव में लालू प्रसाद मधेपुरा से भी चुने गए थे। मधेपुरा सीट को उन्होंने खाली कर दिया। गोरखपुर से आने वाली नदी -झरही के तट पर बसा एक गांव सारण ( सरना) है। प्रसिद्ध लेखक हवलदार त्रिपाठी सहृदय का मानना है कि संभवत: इस गांव के नाम पर ही सारण बना है। 1857 के विद्रोह के समय अंग्र्रेजों ने सारण में छावनी बनाई थी। मीरकासिम की पराजय के बाद 1764 ईस्वी में छपरा पर अंग्रजों का कब्जा हुआ था। 1766 में छपरा में लार्ड क्लाइव,अवध के नवाब शुजाउदौला,बादशाह शाह आलम के वजीर मुनीरुद और बनारस के राजा बलवंत सिंह की एक बैठक हुई थी, जिसमें मराठों के आक्रमण को रोकने के लिए सबके बीच एक सन्धि हुई थी। इतिहास में यह बैठक मराठों के विरुद्ध छपरा कांग्रेस के रूप में जानी जाती है। 1765 में ही हुसेपुर राज के फतेह साही ने अंग्रेजी आधिपत्य के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया था। उन्हीं के विद्रोह की पृष्ठभूमि में सारण तत्कालीन बिहार प्रदेश में बनने वाला पहला जिला था। प्रसिद्ध भिखारी ठाकुर का गांव कुतुबपुर सारण में है। विदेशी यात्री ट्रैवेनियर और बर्नियर ने भी 1666 में छपरा का भ्रमण किया था। सारण जिले में 20 ब्लाक तथा 330 पंचायतें हैं। जिले का क्षेत्रफल 2624 वर्ग किलोमीटर है। सारण जिले की आबादी 3,248,701 है। इसमें 2,0हिन्दू तथा 3,37,767 मुसलमान हैं। अनुसूचित जाति की आबादी 3,8है। इस जिले की साक्षरता दर 52.01 प्रतिशत हैं और 54.10 प्रतिशत आबादी गरीबी रखा के नीचे बसती है। दलित समुदाय में खेतिहर मजदूरों की तादाद 72.2 प्रतिशत से अधिक है। जिले की प्रति व्यक्ित आय 2पए है। जिले के 50.33 प्रतिशत लोगों के पास टेलीफोन, रडियो ,साइकिल की सुविधा उपलब्ध नहीं है। शहरी आबादी सिर्फ प्रतिशत है। 2.65 लाख हेक्टेयर भूक्षेत्र है,ािसमें 1.लाख हेक्टेयर में खेती होती है। जिले का 44.42 प्रतिशत क्षेत्र सिंचित है। सारण के ब्ैांकों में 1,0 लाख रुपए जमा है,ाबकि ब्ैांकों ने सिर्फ 500लाख रुपए ऋण दिए हैं। सारण जगलाल चौधरी,सैयद महमूद,सत्यनारायण सिंह,पशुपति, दारोगा प्रसाद राय जसे नेताओं का क्षेत्र रहा है।ड्ढr ड्ढr महामाया प्रसाद सिन्हा और दारोगा प्रसाद राय बिहार के मुख्यमंत्री भी बने। 1े चुनाव में सारण सदर पश्चिम से वीरश दत्त सिन्हा तथा सारण सदर पूर्व से द्वारिका नाथ तिवारी चुने गए थे। 1े चुनाव में सारण गैर मुस्लिम क्षेत्र से बाबू सत्यनारायण सिन्हा सेंट्रल एसेम्बली के लिए चुने गए थे। छपरा संसदीय क्षेत्र से राजेंद्र सिंह, राम एस.पी.सिंह, सत्यदेव सिंह,रामबहादुर राय, हीरा लाल राय तथा राजीव प्रताप रूडी और लालू प्रसाद चुने जाते रहे हैं।

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