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मंदी ने झुठलाया-हीरा है सदा के लिए

हीरा है सदा के लिए। यदि आप सब प्राइम संकट और उससे उपजी वैश्विक मंदी के दौर में एसा कहते हैं तो यकीनन आप गलतफहमी में जी रहे हैं। मंदी से डायमंड सिटी सूरत डगमगा चला है। 75 हाार करोड़ रकम की राजस्व और विदेशी मुद्रा उपलब्ध कराने वाले शहर सूरत के हीरा कारोबार में तकरीबन तीस फीसदी की कमी आ गई है। इस कमी की मार हीरा घिसने वाले मजदूरों के साथ-साथ हीरा कारोबार यूनिट के मालिकों पर गंभीर रूप से पड़ी है। सूरत डायमंड एसोसिएशन के अध्यक्ष सी पी वनानी का कहना है कि वैसे पक्के तौर पर कोई आंकड़ा पेश नहीं किया जा सकता लेकिन कारोबार में तीस फीसदी की कमी का अनुमान हम लगा रहे हैं। यूरोप-अमेरिका से मांग पूरी तरह ठप है। मैन्युफैक्चरिंग का काम तो बिलकुल ही बंद है, एक भी यूनिट में काम नहीं चल रहा। वनानी का कहना है कि दीवाली पर कटिंग-पॉलिश करने वाले मजदूर अमूमन 15-20 दिनों की छुट्टी पर अपने घर जाते थे लेकिन मंदी की वजह से हम लोगों की ओर से उन्हें 40 से 45 दिनों तक छुट्टी पर रहने को कहा है। यह मजदूर हिन्दी भाषी प्रदेशों से आते हैं और दिसंबर में ही उनके सूरत लौटने की उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने कहा कि हर साल दीवाली से पहले ही यूरोप और अमेरिका से क्रिसमस के लिए मांग आती थी। यह मांग इस बार ठप है। मांग पर असर डालर की कीमत में उतार-चढ़ाव के कारण भी हुआ। पिछले दो तीन महीने से डिमांड नहीं निकल रही।

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