DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

रिसर्च में फुंके 400 करोड़, शोधपत्र सिर्फ दो

जीनोम अनुसंधान के लिए जोर-शोर से शुरू की गई परियोजनाओं के देश में अब तक कोई प्रभावशाली नतीजे नहीं निकले। दसवीं पंचववर्षीय योजना में इस कार्य के लिए कुल 250 रुपये आवंटित किए गए थे जो कब के खर्च हो गए। 2007 में 11वीं योजना में जीनोम अनुसंधान के लिए 1077 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। इसमें से भी लगभग डेढ़-दो सौ करोड़ रुपये ही खर्च होने को बचे हैं, लेकिन अभी तक कोई महत्वपूर्ण खोज भारत के हाथ नहीं लगी। जीनोम रिसर्च का कार्य मुख्यत: तीन वैज्ञानिक महकमों के जिम्मे है। इनमें वैज्ञानिक एवं औद्यौगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)। इन महकमों में से सिर्फ सीएसआईआर जीनोम पर दो शोधपत्र प्रकाशित करने में सफल रहा। एक में देश में ओरिजन के हिसाब से लोगों की जीन प्रोफाइलिंग की गई थी और दावा किया गया था कि उत्तर भारतीयों को मधुमेह का खतरा ज्यादा है। दूसर अध्ययन में दावा किया गया था कि वात, कफ और पित्त पर आधारित आयुव्रेदिक उपचार पद्धति जीन आधारित है। लेकिन दोनों अध्ययन बहुत छोटे सैंपल पर आधारित थे। आईसीएमआर और आईसीएआर कोई शोध पत्र प्रकाशित करने में विफल रहे। हाल में संसद में पेश एक दस्तावेज के अनुसार वैज्ञानिक अनुसंधान पर खर्च में अब भारी बढ़ोत्तरी हो चुकी है। दसवीं योजना में वैज्ञानिक महकमों को 25,301 करोड़ आवंटित हुए लेकिन 11वीं योजना में इसमें तीन गुने की बढ़ोत्तरी के साथ यह 75,304 करोड़ पहुंच गई। जीडीपी के प्रतिशत के रूप में अभी भी यह एक फीसदी से नीचे ही है। इसमें से जीव विज्ञान पर शोध के लिए 10वीं एवं 11वीं योजना में क्रमश 2,151 तथा 7,57रोड़ रुपये दिए गए।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: रिसर्च में फुंके 400 करोड़, शोधपत्र सिर्फ दो