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जमीन तो नहीं मिली बच्ची से भी हाथ धोया

लेखपाल और प्रधान की साजिश के चलते घर से बेदखल धरने पर बैठे दूधनाथ की ढाई साल की बेटी नमिता ने गुरुवार की भोर में जिला मुख्यालय पर भूख से तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। मामला तूल न पकड़े इसलिये पुलिस ने लठियां बरसाकर पीड़ित परिवार को हिरासत में ले लिया। दिन भर दूधनाथ के परिवार वालों को किसी से मिलने नहीं दिया गया। फिर पुलिस ने अपनी देखरख में बच्ची का क्रिया-कर्म कराने के बाद उन्हें गांव भेज दिया। नौ सप्ताह से मुख्यमंत्री के सचिव कमरान रिावी समेत तमाम अधिकारियों की चौखट पर गुहार लगा रहा दूधनाथ इस घटना से ऐसा टूटा गया कि उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पुलिस ने दूधनाथ के बोलने पर अघोषित प्रतिबंध लगा दिया। देर शाम दूधनाथ को अपने साथ ले जा रहे एसओ बड़ागांव ने कहा कि इसके खिलाफ कुछ आपरधिक मामले दर्ज है। मूल रूप से गुरुदासपुर (मिर्जामुराद) गांव निवासी दूधनाथ पिछले 22 साल से अपनी ससुराल गोकुलपुर (बड़ागांव) में रहते हुए मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता था। बंजर जमीन पर बनी झोपड़ी ही उसके परिवार का ठिकाना थी। आरोप है कि ग्राम प्रधान शिवशक्ित उर्फ राजन ने 11 अगस्त को लेखपाल से मिलकर उसकी झोपड़ी गिरा जमीन समतल कर दी। जिससे बरसात में उसका सारा सामान भीगकर खराब हो गया। पत्नी चिरौंजी, बेटी सोनी (14), नत्थू (8), कविता (4) और नमिता (2.5) खुले आसमान के नीचे आ गये। खाना बनाने का ठिकाना नहीं रहा जिससे बच्चे स्कूल से मिलने वाले मिड डे मील पर निर्भर हो गये। इसकी शिकायत एसओ बड़ागांव से लेकर एसएसपी, तहसीलदार से लेकर मंडलायुक्त तक की गयी लेकिन सुनवाई नहीं हुई। न्याय की गुहार लगाता दूधनाथ 2अगस्त को परिवार के साथ जिला मुख्यालय पर धरने पर बैठ गया। शाम तक बेटी कविता और नमिता का स्वास्थ्य बिगड़ने पर एसडीएम ने उन्हें दीनदयाल अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से छुट्टी मिलने के बाद वह फिर दूधनाथ धरने पर बैठ गया। 11 सितम्बर को एसडीएम पिण्डरा ने जमीन देने का आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। 22 सितम्बर को वह फिर मुख्यालय पहुंचा और धरने पर बैठ गया जहां नमिता फिर बीमार हो गयी उसे जमीन देने के आश्वासन के साथ अस्पताल भर्ती कराया गया। अगले दिन डिस्चार्ज होने के साथ दो बिस्वा जमीन देने का एसडीएम ने टेलीफोन पर आदेश दिया। लेकिन फिर वहीं हुआ दूधनाथ एक सप्ताह तक अधिकारियों के कार्यालयों में चक्कर काटता रहा पर जमीन नहीं मिली। कानूनगो ने कह दिया कि एसडीएम ने जमीन देने से इंकार कर दिया है। दूधनाथ ने विधानसभा अध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री के सचिव कामरान रिावी को प्रार्थनापत्र देकर गुहार लगायी लेकिन हर जगह सिर्फ कोर आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। इससे क्षुब्ध होकर वह फिर बुधवार को परिवार सहित जिला मुख्यालय पर धरने पर बैठ गया। भोर में बच्ची नमिता की मौत के बाद प्रशासन की नींद टूटी। दूधनाथ शव के साथ धरने से हटने को राजी नहीं था। पुलिस ने लाठियां बरसाकर परिवार को जीप में लाद लिया और दूधनाथ से मिलने पर रोक लगा दी।

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  • Web Title: जमीन तो नहीं मिली बच्ची से भी हाथ धोया