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ये भत्ते तो सरकार को दिवालिया कर देंगे

ेंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को यदि हूबहू लागू किया गया तो राय सरकार का दिवाला निकल जाएगा। विकास योजनाएँ ठप हो जाएँगी। इसलिए केवल नए वेतनमान और महँगाई भत्ते के बार में निर्णय किया गया है। अन्य भत्तों के बार में सरकार वेतन समिति की फाइनल रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लेगी। एस.ए.टी. रिजवी की अध्यक्षता वाली समिति अपनी अंतरिम रिपोर्ट नवम्बर अंत तक राय सरकार को सौंप देगी।ड्ढr सूत्रों के अनुसार राय सरकार ने एक जनवरी 2006 से नए वेतनमान लागू करने की घोषणा कर रखी है। इस वजह से राय सरकार पर मोटे तौर पर करीब साढ़े पाँच हजार करोड़ रुपए सालाना का बोझ बढ़ने का अनुमान है। एरियर के रूप में इस साल करीब पंद्रह हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा। वेतन समिति यदि केंद्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुरूप मकान किराया भत्ता, शैक्षणिक और वाहन भत्तों को हूबहू लागू करने की संस्तुति करती है, तब राय सरकार पर वित्तीय बोझ और बढ़ जाएगा। इससे आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमराने के आसार हैं। प्रदेश पर इस समय करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। भावी आर्थिक संकट के खतर को लेकर शासनतंत्र में सुगबुगाहट है। आय बढ़ाने के लिए वाणिय कर और निबंधन विभाग पर विशेष दबाव है। सभी विभागों से चालू वित्तीय वर्ष के बजट से पाँच फीसदी कटौती करने का भी निर्देश जारी हुआ है।ड्ढr वित्तीय मामलों के जानकार सूत्रों ने बताया कि इन भत्तों को लेकर लगभग सभी राय सरकारों की नींद हराम है। केंद्रीय वेतन आयोग ने इस बार अपनी संस्तुति में मकान किराया भत्ते (एच.आर.ए.) के तीन स्लैब 25, 15 और 10 फीसदी रखे हैं, जो केंद्रीय कर्मचारियों पर लागू हो गए हैं। लेकिन यू.पी. सरकार पर ये स्लैब भारी पड़ेंगे। नए फामरूले से एच.आर.ए. कई गुना बढ़ाना पड़ेगा। केंद्रीय कर्मियों को एक बच्चे पर हजार रुपए प्रतिमाह का शैक्षणिक भत्ता, यदि बच्चा हास्टल में रहता है, तो तीन हजार रुपए हास्टल भत्ता देने का निर्णय लिया गया है। यदि केंद्रीय कर्मचारी के दो बच्चे हॉस्टल में हैं तब उन्हें कुल आठ हजार रुपए भत्ता देना पड़ेगा। यह भत्ता भी गले की हड्डी बन गया है।ड्ढr केंद्र सरकार ने इस बार नगर प्रतिकर भत्ता (सीसीए) के स्थान पर उच्चतम स्तर के केंद्रीय अधिकारियों को ट्रांसपोर्ट एलाउंस के मद में प्रतिमाह 32 सौ रुपए प्लस डीए और न्यूनतम स्तर पर छह सौ और डीए देने का निर्णय लिया है। अब राय सरकार के लिए सभी कर्मचारियों को ट्रांसपोर्ट एलाउंस देना भी गले की हड्डी साबित होगा।

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