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दूसरे सूबे में नहीं ले जा पाएंगे पशु

सरकार माने या न माने लेकिन एशिया के सबसे बड़े सोनपुर पशु मेले की पहचान अब राज्यस्तरीय मेले की होकर रह जायेगी! बेचने के लिए तो पशु विदेशों से भी लाये जा सकेंगे लेकिन विदेशी की कौन कहे दूसर राज्य के भी किसी व्यक्ित की इस मेले से पशु खरीदने की हसरत पूरी नहीं हो सकेगी। अगर ऐसा करने में समर्थ हो भी गये तो वे अपने इस नये मेहमान को घर तो कतई नहीं ले जा सकेंगे। राज्य से पशुओं को बाहर ले जाने पर रोक के लिए बना कानून इसमें सबसे बड़ी बाधा है। सरकार इसमें कोई शिथिलता भी नहीं बरतने वाली है। राज्य से पशुओं को बाहर ले जाने के लिए उन्हें न तो रलवे रैक उपलब्ध करा पायेगा न ही कोई ट्रान्सपोर्ट कंपनी ट्रक दे पायेगी। पशुओं की कीमत पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि सरकार इसे राज्यहित में उठाया गया कदम मानती है।ड्ढr ड्ढr पशुपालन विभाग के प्रधान सचिव भानु प्रताप शर्मा ने बताया कि राज्य में दुधारू पशुओं की कमी को देखते हुए ऐसा कदम उठाया गया है। इसमें किसी भी प्रकार के परिवर्तन के लिए कानून में संशोधन करना पड़ेगा जो राज्यहित में नहीं होगा। उन्होंने बताया कि राज्य के किसानों के पास अच्छे नस्ल के पशु हों इसके लिए सरकार ने दो अधिकारियों को पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश भेजा है। ये अधिकारी वहां के अधिकारियों से संपर्क कर इस बात के लिए प्रेरित करंगे कि उन राज्यों से किसान अधिक से अधिक संख्या में पशु लेकर सोनपुर मेले में पहुंचे। इससे राज्य के पशुपालकों के पास अच्छी नस्ल के पशुओं की खरीद के लिए बेहतर ऑप्सन मिलेगा। उन्होंने कहा कि मेले के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप में बदलाव नहीं होगा। बाहर के व्यापारी तो अपने पशुओं के साथ मेले में रहेंगे ही। वे खरीद भले न सकें बेच तो सकते ही हैं।

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