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देश झारखंड में दुखदायी है नरगा की तसवीर

लाइव हिन्दुस्तान टीम
Sun, 15 Mar 2009 01:00 PM
 झारखंड में दुखदायी है नरगा की तसवीर

झारखंड में नरगा की तसवीर बड़ी दुखदायी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 44 फीसदी लोगों ने राज्य में नरगा के तहत काम मांगा। काम पाने वालों में महिलाओं की संख्या 12 फीसदी थी। यहां सोशल ऑडिट का काम दुष्कर है, क्योंकि सवाल उठानेवालों की हश्र कामेश्वर यादव, ललित मेहता और सोमा गागराई जसा होता है। भ्रष्ट राजनीतिज्ञों, अफसरों और ठेकेदारों का नेक्सस नरगा पर इस तरह हावी है कि जरूरतमंदों को न काम मिल पा रहा है, न काम का वाजिब दाम।ड्ढr ये बातें शुक्रवार को राजधानी के एक्सआइएसएस सभागार में नरगा पर शुरू हुए तीन दिवसीय राज्य स्तरीय अधिवेशन के पहले दिन सामने आयीं। अधिवेशन का आयोजन झारखंड नरगा वाच ने किया है।ड्ढr सुप्रीम कोर्ट कमिश्नर के राज्य सलाहकार बलराम ने अधिवेशन को संबोधित करते कहा कि जिन राज्यों में भाजपा का शासन है, वहां नरगा की स्थिति बेहतर है। पार्टी ने अपने जनसंघ के दिनों का नारा याद रखा, जिसमें हर हाथ को काम की बात कही गयी थी।ड्ढr उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार नरगा के प्रति उदासीन है। तापस सोरन, शिवशंकर साव और तूरिया मुंडा की मौतों के उदाहरण यह बताने को काफी हैं कि यहां नरगा का हाल क्या है। नरगा का नेतृत्व करने वाले ग्रामीण विकास मंत्री इस पर कभी भी कुछ नहीं बोलते। उनके बेटे की जन्मदिन की पार्टी में शामिल लोगों की पहचान करनी होगी, क्योंकि वैसे ही लोगों से हमारा संघर्ष है।ड्ढr झारखंड में राजनीतिक इच्छाशक्ित की कमी : प्रो. ज्यां द्रेजरांची। प्रो ज्यां द्रेज ने कहा कि योजना की बदहाली की मुख्य वजह है सरकार में इच्छाशक्ित की कमी। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सरकारों की ठोस पहल से वहां स्थिति में काफी सुधार आया है।ड्ढr राजस्थान की सरकार देखती है कि सबको काम मिले और समय पर मजदूरी का भुगतान मिले। भ्रष्ट राजनीतिज्ञ, अफसर और ठेकेदारों के नेक्सस को दरकिनार करते हुए मजदूरों का हित देखा गया। झारखंड की कार्यसंस्कृति में परिवर्तन लाने में मीडिया और अदालत को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। नरगा को पॉलिटिकल एजेंडा में लाना होगा। नरगा में बड़ी शक्ित है, जो लोगों के सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नरगा से जुड़े श्रमिकों की यूनियन बनाने की जरूरत है। वह शुक्रवार को नरगा पर राज्य स्तरीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। इसका आयोजन झारखंड नरगा वाच ने सात से नौ नवंबर तक एक्सआइएसएस सभागार में किया है। उन्होंने कहा कि विगत वर्षो में यहां कुछ परिवर्तन आया है। कार्यस्थलों में शोषण में कमी आयी है।पर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। ं

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