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दिल्ली में शीला की तीसरी पारी के आसार

दिल्ली में शीला दीक्षित की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार की तीसरी पारी के आसार दिख रहे हैं। एसी नेल्सन और हिन्दुस्तान-स्टार न्यूज के चुनाव पूर्व सव्रेक्षण से यह बात सामने आई है कि दिल्ली के लोग बढ़ती महंगाई, कानून व्यवस्था की खराब हालत, आतंकवादी वारदातों और स्वच्छ पेयजल की दिक्कतों के कारण कांग्रेस की मौजूदा सरकार से नाराज तो हैं लकिन यह नाराजगी इतनी ज्यादा नहीं है कि भाजपा या किसी और पार्टी को सरकार बनान का मौका मिले। दिल्ली के 31 विधानसभा क्षेत्रों में 27 अक्टूबर से 1 नवम्बर के बीच 6248 मतदाताओॅ के बीच किए गए इस व्यापक सव्रेक्षण के आधार पर सव्रेक्षणकर्ताओं का अनुमान है कि कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले 6.1 फीसदी वोट का नुकसान होगा लकिन उसके पास 70 सदस्यों की विधानसभा में 38 विधायक होंगे। अनुमान है कि भाजपा को 2सीटें मिलेॅगी और उसके वोट में पिछली बार की तुलना में 4.2 फीसदी का इजाफा भी होगा। बसपा को 10 फीसदी वोट मिलन का अनुमान है लकिन ये वोट उस कोई सीट दे पाएंगे, इसमें संदेह है। अन्य को 8.5 फीसदी वोट मिलन का अनुमान है और उन्हें 3 सीटें मिल सकती हैं। इस सव्रेक्षण में मतदाताओं ने जिन मुद्दों को चुनावी माना है उसमें मूल्यवृद्धि, विधि व्यवस्था, रोजगार, आतंकवाद और गरीबों के साथ न्याय अहम है। कांग्रेस की मौजूदा सरकार से लोगों का जो भी मोहभंग हुआ है वो मुख्य रूप से महंगाई, विधि व्यवस्था और आतंकवाद के कारण नजर आ रहा है। विपक्षी भाजपा के दर्शन को 31 फीसदी लोगों ने अच्छा या बहुत अच्छा कहा जबकि 22 फीसदी की नजर में यह बुरा या बहुत बुरा रहा। सव्रेक्षण में शामिल 37 फीसदी मतदाता शीला दीक्षित को दिल्ली के लिए बेहतर मुख्यमंत्री का उम्मीदवार मानते हैं, जबकि भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी विजय कुमार मल्होत्रा को बेहतर दावेदार मानने वालों की तादाद महज 14 फीसदी है।

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