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झारखंड में संशोधित दर पर मजदूरी का भुगतान नहीं : ज्यां द्रेज

झारखंड में नरगा के तहत संशोधित दर पर मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है। सरकार ने एक नवंबर से संशोधित दर पर मजदूरी के भुगतान का आदेश दिया है। नरगा को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है। संशोधित दर के अनुसार कड़ी मिट्टी के लिए 44 रुपये, नरम मिट्टी के लिए 54 रुपये और अति नरम मिट्टी की कटाई के लिए 73 रुपये प्रति चौका निर्धारित किया गया है। उक्त बातें एक्सआइएसएस सभागार में नरगा पर आयोजित राज्य स्तरीय अधिवेशन के दूसर दिन प्रो ज्यां द्रेज ने कहीं। उन्होंने बताया कि मजदूर को समय पर मजदूरी नहीं मिलने से उसकी परशानी बढ़ जाती है। 15 दिन के अंदर मजदूरी के भुगतान का प्रावधान है। लेकिन भुगतान में एक से डेढ़ महीने का समय लग जाता है। बैंक और पोस्ट ऑफिस से भुगतान होने के कारण भी परशानी हो रही है। कार्यस्थल पर मस्टर रोल नहीं रखा जाता है।ड्ढr व्योमकेश कुमार लाल ने प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। अधिनियम के तहत साल भर में एक व्यक्ित को सौ दिन का कार्य उपलब्ध कराने का प्रावधान है। प्रत्येक सप्ताह मजदूरी के भुगतान का प्रावधान है। 15 दिन के अंदर भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही गयी है। समय पर मजदूरी का भुगतान नहीं करने की स्थिति में मजदूर मुआवजे की मांग कर सकता है। लाल ने बताया कि मजदूरी भुगतान में पारदर्शिता का अभाव है।ड्ढr शनिवार को अधिवेशन तीन सत्रों में चला। इसमें काम की मार और बेरोगारी भत्ता, मजदूरों की भागीदारी और सामाजिक अंकेक्षण से लाभ तथा कार्यकर्ताओं को होनेवाली परशानी पर चर्चा की गयी। मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता स्टेन स्वामी ने विस्थापन पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि भू-स्वामी की सहमति के बगैर उद्योग स्थापित करना उचित नहीं है। कार्यशाला को सुप्रीम कोर्ट कमिश्नर के राज्य सलाहकार बलराम, ज्योत्सना तिर्की और अन्य ने भी संबोधित किया।

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