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नागपुर टेस्ट: दबाव में विश्व चैंपियन टीम

याद नहीं आता ऑस्ट्रेलियाई टीम को कभी इतना डिफेंसिव देखा हो। दुनिया की नंबर एक टीम भारत के खिलाफ चौथे टेस्ट मैच के तीसरे दिन इतना धीमा खेली कि केवल 166 रन और बना सकी। जिस टीम ने दूसरे दिन जोरदार वापसी का माद्दा दिखाया हो वह अगले दिन इतना अतिसुरक्षित रवैया अपना लेगी यह हैरत में डालने वाला था। हो सकता है कि यह मेहमान टीम की योजना का हिस्सा हो, लेकिन इसकी वजह से उसने मैच पर पकड़ बनाए रखने का मौका खो दिया। हालांकि साइमन कैटिच के शतक और माइकल हसी की 0 रन की पारी से ऑस्ट्रेलिया पहली पारी में 355 रन बनाने में सफल रहा। भारत ने पहली पारी में 441 रन बनाए थे। ऑस्ट्रेलिया ने पहले सत्र में तो केवल 42 रन जोड़े। दूसर सत्र में यह आंकड़ा 4और अंतिम में 75 रन का रहा। तीसर दिन भारतीय बल्लेबाजों को भी एक ओवर खेलने के लिए उतरना पड़ा। मिशेल जानसन की छह की छह गेंदें विरंदर सहवाग ने खेली और बिना रन बनाए अपने साथी बल्लेबाज मुरली विजय के साथ पैवेलियन लौट गए। जाहिर है भारत के शीर्ष बल्लेबाजों की अग्निपरीक्षा कल होनी है। मेजबान टीम के पास 86 रन की बढ़त है। अगर टीम इंडिया को गांगुली और लक्ष्मण की खातिर यह मैच जीतना है तो बल्लेबाजों को इतने रन बोर्ड पर टांगने होंगे कि वह दोबारा ऑस्ट्रेलिया को खेलने का मौका देकर उसे फिर ऑल आउट भी कर सके। मैच का परिणाम क्या रहेगा यह कल पहले सत्र का खेल तय करगा। फिलहाल गेंद अब भारतीय बल्लेबाजों के पाले में है। पहले दिन रन मशीन सचिन तेंदुलकर ने एकदम ठीक कहा था कि इस मैच में अभी क्रिकेट बाकी है। उनकी बात एकदम सही साबित हो रही है। शायद ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों पर विकेट पर टिके रहने का भारी दबाव था। वरना कल रन पर खेल रहे कैटिच अपने पांचवें टेस्ट शतक तक पहुंचने के लिए इतना समय बर्बाद नहीं करते। शतक पूरा होते ही जहीर ने उन्हें अपना एलबीडब्ल्यू शिकार बना लिया। कैटिच ने नौ चौकों की मदद से 102 रन बनाए। भारत के खिलाफ यह उनका दूसरा शतक है। कैटिच और हसी ने तीसर विकेट पर 155 रन की पॉर्टनरशिप की। यह ऑस्ट्रेलियाई पारी की सबसे बड़ी साझेदारी है। कैटिच की जगह आए माइकल क्लार्क को इशांत ने स्विंग हुई गेंद पर धोनी के हाथों लपकवा दिया। क्लार्क केवल 08 रन बना सके। माइकल हसी दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से उस समय रन आउट हो गए जब वह शतक से दस रन दूर थे। शॉट खेलकर हसी क्रीज से बाहर निकल गए जबकि मुस्तैद मुरली विजय ने गेंद विकेट पर थ्रो कर दी। विजय का थ्रो तो विकेट पर नहीं लगा पर धोनी ने फुर्ती दिखाते हुए उसे गिल्लियां गिरा दीं। हसी ने 0 रन बनाए जिसमें आठ चौके भी शामिल हैं। उसके बाद हरभजन सिंह की एक गेंद शफल होकर शेन वाटसन की गिल्लियां गिरा गयी। बाद के बल्लेबाजों में कैमरून व्हाइट (46) और ब्रैड हैडिन (28) रनों का फासला पाटने में कुछ सफल रहे। इन दोनों ने सातवें विकेट पर 52 रन की उपयोगी साझेदारी भी निभाई। ऑस्ट्रेलियाई पारी धीमी रहने का सबसे बड़ा उदाहरण ये है कि उसने 304 रन के बाद पहला चौका 347 रन पर पहुंचने के बाद लगाया। भारत के लंबू गेंदबाज इशांत शर्मा दुर्भाग्यशाली रहे कि दो बार उनकी गेंदों पर कैच छूटे। पहले द्रविड़ ने कैटिच का कैच टपका दिया। उस समय वह रन पर खेल रहे थे। दूसरी मर्तबा लक्ष्मण ने जानसन को ड्राप कर दिया।

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