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20 फीसदी लोग ‘हाई बीपी’ के मुहाने पर

भले ही आप डाक्टर की जांच में हाइपरटेंशन के रोगी न हों, लेकिन क्या आपका ब्लड प्रेशर बार्डरलाइन को टच कर रहा है? ऐसे लोगों में हार्ट, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी फेलियर का खतरा कहीं ज्यादा है। एक ताजे अध्ययन के अनुसार देश में 30-55 साल की उम्र के 15-20 फीसदी लोग हाइपरटेंशन के मुहाने पर हैं या प्री-हाइपरटेंशन की चपेट में हैं। आईसीएमआर जर्नल में प्रकाशित एक दस्तावेज के अनुसार देश में ऐसे लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जिनका रक्तचाप है तो तय सीमा के भीतर, लेकिन वह बार्डर लाइन तक पहुंच चुका है। मसलन, यदि रक्तचाप 0140 एमएमएसजी से ऊपर पहुंचे तो रोगी को हाइपरटेंशन का मरीज माना जाता है। जबकि 85130 रक्तचाप को नार्मल माना जाता है। स्वस्थ व्यक्ित के लिए आइडियल ब्लड प्रेशर 80120 माना जाता है। यह दीगर बात है कि हाल में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने इसमें कुछ और संशोधन करते हुए रक्तचाप 75115 को ज्यादा मुनासिब ठहराया है। एम्स के पूर्व प्रोफेसर और फोर्टिज अस्पताल के निदेशक मेटाबॉलिज्म डा. अनूप मिश्र के अनुसार कुछ अरसा पहले तक बार्डरलाइन को टच कर रहे रक्तचाप को नार्मल माना जाता रहा है लेकिन अब इसे ‘हाई नार्मल’ की रंज दी गई है। यह थ्योरी भी अमेरिका में बस चुके एम्स के एक विशेषज्ञ रामचंद्रन वासन ने ही प्रतिपादित की है। क्योंकि जिन व्यक्ितयों का रक्तचात बार्डरलाइन को टच कर रहा होता है, उनमें हार्ट और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा सामान्य रक्तचाप वाले व्यक्ित की तुलना में ढाई गुना अधिक हो जाता है। मिश्र के अनुसार 30 साल की उम्र पार कर चुके 15-20 फीसदी लोग हाई नार्मल ब्लड प्रेशर से ग्रसित हैं। इसलिए यदि रक्तचाप 85130 से जरा भी ज्यादा होने लगे तो उसे कम करने के प्रयास शुरू कर देने चाहिए। ऐसी स्थिति में डाक्टर अमूमन दवाएं नहीं सुझाते बल्कि एक्सरसाइज और योग पर जोर देते हैं। इन दोनों तरीके से हाई नार्मल ब्लड प्रेशर के मरीज रक्तचाप घटा सकते हैं।

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