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मुस्लिम दलों से साझा मंच बनाने की अपील

लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए सभी मुस्लिम पार्टियाँ एक साझा मंच बनाएँ। उनको अब सपा-बसपा जसी अवसरवादी दलों के पीछे चलना बंद कर देना चाहिए। इन दलों ने आज तक मुसलमानों की तरक्की व पिछड़ेपन को दूर करने के लिए कुछ नहीं किया है। यह अपील रविवार को टीले शाह पीर मोहम्मद मसिद अलविदा मैदान पर मुस्लिम सियासी बेदारी फोरम एक दिन की कांफ्रेस में सभी वक्ताओं ने मुस्लिम सियासी दलों से की। कांफ्रेंस में उलेमा व मुस्लिम विद्वानों ने दहशतगर्दी के नाम पर परशान किए जा रहे मुसलमानों के लिए राजनैतिक दलों की निंदा भी की। कांफ्रेन्स के मुख्य वक्ता टीएमएमके (तमिलनाडु मुस्लिम मुनेत्र कड़गम) के अध्यक्ष जवाहरूल्लाह ने इस बात पर गहरा अफसोस जाहिर किया कि दक्षिण भारत की तुलना में उत्तर भारत में मुस्लिमों की साक्षरता दर काफी कम है। इसी कमजोरी का सियासी दल लाभ उठाते हैं। साक्षरता दर को बढ़ाने के लिए भी सभी मुस्लिम दलों को सोचना होगा। उन्होंने कहा कि राजनैतिक गलियारों को सुधार बिना हम कतई आगे नहीं बढ़ सकते। अमीर फलाही बैतुमाल के जहाँगीर आलमी कासमी ने सभी से अपील की कि वे अपने-अपने धर्म में रहकर मुल्क को आतंकवाद से बचाने के लिए काम करं। उन्होंने एक शेर ‘बिछड़े हुए मिल जाएँ तमन्ना तो यही थी, हो जाए चमन एक तकाजा तो यही था’ के जरिए हिन्दू-मुसलमानों के बीच प्रेम बढ़ाने की अपील की। इस मौके पर नेशनल लोकतांत्रिक के अरशद खान ने कहा कि मालेगाँव बम विस्फोट में सेना का शामिल होना बेहद अफसोसजनक है। उन्होंने कहा कि कानपुर बम ब्लास्ट की मौजूदा सरकार ने अभी तक न्यायिक जाँच नहीं कराई। उन्होंने कहा कि जब तक मुसलमान राजनैतिक रूप से मजबूत नहीं होंगे तब तक शराब व सूदखोरी जसी बुराइयाँ मुस्लिम समाज से दूर नहीं हो सकतीं। उन्होंने निर्दोष को बचाने के लिए आजमगढ़ आयोग बनाने की भी माँग की। कांफ्रेंस में इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुलेमान ने इस बात पर सवाल उठाया कि लोकतांत्रिक देश में आरएसएस जसे संगठनों का कोई काम नहीं है। उन्होंने भी कानपुर ब्लास्ट की न्यायिक जाँच न कराए जाने पर अफसोस जाहिर किया। कांफ्रेंस में ताहिर मदनी, अताउर्रहमान वजदी, फाुर्लरहमान, आमिर रशदी मदनी, खालिद साबिर, मुस्लिम मजलिस के नदीम समेत अन्य कई वक्ताओं ने भी सम्बोधित किया।

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  • Web Title: मुस्लिम दलों से साझा मंच बनाने की अपील