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राजरंग

लइड़ के लिये झारखंडआजकल खूबे चंदा-चिट्ठा हो रहल हय। दिन में चंदा और रात में पार्टी। आखिर स्टेट के हैप्पी बर्थ डे का सवाल है। एक सप्ताह बाद ही हैप्पी बर्थ डे आनेवाला है। उसको सेलिब्रेट भी तो करना है। उसमें खरचा तो होबे करगा। अब घर से लगाकर कोई इसमें थोड़ियो ना खर्चा करगा। पब्लिक से चंदा उठेगा तभी न खर्चा होगा। इसमें ऑब्जेक्शन वाला कौन सा बात है भाई? स्टेट अपना है आउर ऊपर वाले की किरिपा से सरकरवा भी अपने है। अब हम सेलिब्रेट नय करंगे, तो कौन करगा। इसके लिए तो चंदा उठबे करगा। लइड़ के लिये हैं झारखंड, तो का चंदा भी लइड़ के लेना होगा? अब कोई कहेगा कि चंदा नय देंगे। इ कोई बात हुई। अर नय कैसे दोगे भाई? चंदा कौनो अपने लिए थोड़े ना मांग रहे हैं। पब्लिकेके लिए मांग रहे हैं। नय कैसे दोगे? सबसे अधिक माल सरकारी अफसरवन उड़ा रहा है, तो चंदवा का पब्लिक देगी? तीर-धनुष कंपनी के वर्कर लोग दिन-रात सोसायटी के लिए काम करता है। झंडा उठाता है, दौड़-भाग करता है। धरना-प्रदर्शन करता है। इ सब पब्लिके के लिए न करता है। अब चंदा-चिट्ठा नय करगा, तो झंडा-बैनर कइसे लायेगा। अब अफसरवन बोलेगा कि इ बड़ा प्रॉब्लम है। प्रॉब्लम है, तो रहे। लेकिन चंदवा तो देवे पड़बे करगा। नय तो लइड़ के लिये झारखंड, तो चंदा भी लइड़ के लेंगे। आउर का?

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