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मालेगांव व नांदेड़ धमाकों में समानता की तलाश

मालेगांव विस्फोटों की जांच का काम जसे जसे आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे इसके पीछे सक्रिय तत्वों के सूत्रों के काफी दूर तक फैले होने की आशंका को बल मिलता नजर आ रहा है। अब नांदेड़ विस्फोट में भी मालेगांव विस्फोटों के आरोपियों की भूमिका को लेकर एटीएस का शक गहराता जा रहा है। मालेगांव विस्फोटों की जांच कर रहे आतंक निरोधक दस्ते (एटीएस) ने इस मामले में गुजरात के दंगस जिले में एक जाने माने स्वामी असीमानंद के आश्रम पर छापा मारा। उनपर आरोप है कि वह अपने ड्राइवर सुनील दहवाड़ के सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे और मालेगांव विस्फोट मामले की मुख्य आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के साथ लगातार संपर्क में थे। इस बीच एटीएस के साथ मिलकर सीबीआई मालेगांव विस्फोटों और नांदेड़ में वर्ष 2006 में हुए विस्फोटों के बीच संबंधों को तलाश करने में जुट गई है। नांदेड़ में बजरंग दल के दो कार्यकर्ता अपने घर पर बम बनाते समय हुए धमाके में मार गए थे। नांदेड़ विस्फोट की जांच सीबीआई ने की थी। अब अचानक सीबीआई के फिर से नांदेड़ मामले में रुचि लेने से यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या उसने यह मामला एटीएस से लेने के बाद साक्ष्यों को दफन करने की कोशिश की।

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  • Web Title: मालेगांव व नांदेड़ धमाकों में समानता की तलाश