DA Image
19 जनवरी, 2020|2:20|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आँकड़े सही हैं तो फिर ये हंगामा क्यों?

नवम्बर : हरदोई, एग्रो विक्रय केन्द्र पर डीएपी के लिए किसानों का हंगामा, तोड़फोड़, पीएसी का लाठीचार्जड्ढr 4 नवम्बर : कुशीनगर, पीसीएफ के गोदाम पर डीएपी के लिए हंगामा, लाठीचार्ज, राष्ट्रीय राजमार्ग जामड्ढr 4 नवम्बर : अम्बेडकरनगर, एग्रो व पीसीएफ के विक्रय केन्द्रों पर भारी हंगामाड्ढr 3 नवम्बर: हरदोई में लाललपालपुर, मल्लावाँ तथा शाहाबाद में हंगामा, लाठीचार्ज, हरदोई-कानपुर तथा हरदोई-लखनऊ रोड जामड्ढr 1 नवम्बर: हरदोई, एग्रो केन्द्र पर हंगामा, पीएसी के लाठी चार्ज में आधा दर्जन किसान घायलड्ढr नवम्बर के पहले सप्ताह में ही डीएपी समेत अन्य फास्फेटिक खाद को लेकर विभिन्न जिलों में किसानों का हंगामा, तोड़फोड़ और बदले में पुलिस का लाठी चार्ज यह बताने के लिए काफी है कि सूबे में फास्फेटिक खाद की क्या स्थिति है? पर, कृषि विभाग इसके लिए जमाखोरी को जिम्मेदार मान रहा है। विभाग की ओर से शासन को दिए गए आँकड़े के अनुसार पिछले साल से अब भी प्रदेश में एक लाख टन अधिक डीएपी मौजूद है। मुख्य आपूर्तिकर्ता इफ्को की ओर से प्रतिदिन पाँच रैक अर्थात साढ़े बारह हजार से अधिक डीएपी प्रदेश में आ रही है। इस तरह इस माह के अन्त तक प्रदेश में तीन लाख टन से अधिक डीएपी आ जाएगी। आँकड़े के अनुसार प्रदेश को इस सीजन में करीब साढ़े छह लाख टन डीएपी की जरूरत है, जबकि व्यवस्था साढ़े सात लाख टन से अधिक की गई है।ड्ढr संयुक्त कृषि निदेशक (उर्वरक एवं खाद) पी के पाण्डेय कहते हैं कि किसान अगर तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए खाद लें तो कोई समस्या नहीं आएगी।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title: आँकड़े सही हैं तो फिर ये हंगामा क्यों?