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जागरूकता की कमी के कारण समस्याएं

राष्ट्रीय ग्रामीण रोगार गारंटी कानून के तीन दिवसीय राज्य अधिवेशन का रविवार को समापन हुआ। अधिवेशन के अंतिम दिन कार्यशाला के दौरान की गयी चर्चा के निष्कर्ष पर विचार किया गया। समापन समारोह में ज्यां द्रेज ने कहा कि नरगा के प्रति जागरूकता और जानकारी से आधी समस्या दूर हो जायेगी। इस क्रम में सोनाहातू प्रखंड की पांच पंचायतों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने नरगा की योजना बनाने में ग्राम सभा को भी शामिल करने की बात कही।ड्ढr अधिवेशन के निष्कर्ष के आधार पर भविष्य की कई योजनाएं बनायी गयीं। चर्चा के बाद मुख्यत: दो बातें सामने आयीं, जिसमें नरगा को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाने और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका पर विचार किया गया। मांगों की सूची तैयार कर एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलेगा। मजदूर संगठन संघ बनाने का निर्णय लिया गया। राज्य स्तरीय कोर कमेटी का भी गठन कर 15 सदस्यों को शामिल किया गया। एक निर्धारित समय के भीतर बेरोगारी भत्ता का भुगतान करने की मांग करने की बात कही गयी। मांगें नहीं माने जाने पर नरगा स्थापना दिवस दो फरवरी को एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर सबकी सहमति से आगे की रणनीति तैयार की जायेगी। 15-30 जनवरी तक काम मांगो आंदोलन चलाया जायेगा। लोक अदालत लगा कर नरगा से संबंधित समस्याओं के निदान का आग्रह किया जायेगा। इसके अलावा सामाजिक अंकेक्षण के दौरान सहयोग करनेवाले ग्रामीणों को धमकी दिये जाने पर भी चर्चा की गयी। अधिवेशन में राज्य के सभी जिलों के अलावा पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, बिहार के प्रतिनिधि शामिल हुए। अधिवेशन के अंतिम दिन नरगा कौंसिल के सदस्य ज्ञान त्रिपाठी भी शामिल थे। अधिवेशन में ज्यां द्रेज, बलराम, ज्योत्सना तिर्की, गुराीत, असीम दास, राजपाल, शालिनी, जवाहर मेहता, व्योमकेश कुमार लाल समेत कई लोग शामिल थे।

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