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पैसा है फिर भी कफन नहीं!

आज भी प्रेमचंद के घीसू और माधो को नहीं नसीब हो रहा कफन। जीते जी रोटी के लाले और मरने के बाद कफन का इंतजार। गरीबों के लिए सरकार की बनायी कबीर अंत्येष्टि योजना की जमीनी सच्चाई यही है। सामाजिक सुरक्षा कोषांग की ओर से बीपीएल परिवार वालों की मौत पर अंत्येष्टि के लिए 1500 रुपये देने की योजना चलाई जा रही है पर स्थिति यह है कि वित्तीय वर्ष बीत जाने के बावजूद वर्ष 07-08 में ही आवंटित 38 लाख 61 हाार में अब भी लगभग 14 लाख रुपये पड़े हुए हैं। पूरी राशि खर्च न होने के कारण वर्ष 08-0े लिए इस योजना में अभी तक राशि का आंवटन नहीं किया गया है।ड्ढr ड्ढr इस योजना के अंतर्गत मुशहरी को 2 लाख 7 हाार, सकरा को लगभग तीन लाख, बंदरा को लगभग पौने दो लाख, मुरौल को लगभग 83 हाार, बोचंहा को डेढ़ लाख, मीनापुर को सवा दो लाख, गायघाट को 2 लाख 12 हाार, कटरा को लगभग पौने दो लाख, औराई को लगभग दो लाख, कांटी को लगभग सवा दो लाख, मोतीपुर को ढाई लाख, साहेबगंज में डेढ़ लाख, सरैया में लगभग साढ़े तीन लाख, पारू को लगभग साढ़े तीन लाख, कुढ़नी को लगभग तीन लाख रुपये का आवंटन किया गया था। मगर अभी तक कहीं भी पूरी राशि का वितरण नहीं हुआ है। इस संबंध में सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक एहतेशाम हुसैन ने बताया कि इस योजना का लाभ पंचायत स्तर पर ही देना है। इसके लिए मुखिया को ही सार अधिकार दिए गए हैं। बहुत सार पंचायतों में राशि खर्च हुई, पर उपयोगिता प्रमाण नहीं देने के कारण विभाग को नहीं भेजा जा सका है। इस वजह से इस वर्ष की राशि नहीं आ सकी है। औराई, पारू को छोड़कर अधिकांश जगहों से प्रमाण पत्र आ चुका है, जिसे विभाग को भेजा जाएगा।

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