DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जीने के लिए कहां से लाएंगे 5 पृथ्वी-2 भारत

जीने के लिए कहां से लाएंगे 5 पृथ्वी-2 भारत

आज विश्व पृथ्वी दिवस पर यह जान लेना जरूरी है दुनियाभर के लोग भले ही अलग-अलग ढंग से जीते हों, लेकिन जब धरती के प्राकृतिक संसाधनों पर बोझ की बात आती है तो उसका असर सामूहिक होता है। स्थिति यह आ गई है कि दुनिया की आबादी सालभर में पृथ्वी के जिन प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करती है, उनकी भरपाई में पृथ्वी को डेढ़ साल लग जाएंगे। एक गणित यह भी कहता है कि हमारी जरूरतें पूरी करने के लिए 1.4 पृथ्वी की और जरूरत है।

ग्लोबल फुटप्रिंट नेटवर्क व सीआईआई ने 2008 की एक रिपोर्ट में कहा था कि जिस तेजी से भारत की अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ रहा है, उसे देखते हुए लोगों की जरूरतें पूरी करने व कचरे के निस्तारण के लिए भारत जैसे एक और देश की जरूरत है। यानी दोगुने प्राकृतिक संसाधन चाहिएं।

वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ की लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट 2010 व फुटप्रिंट ऑर्गनाइजेशन की एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि एक औसत अमेरिकी की जीवनशैली तमाम लोग अपना लें तो उनकी जरूरतें पूरी करने के लिए पांच पृथ्वी की जरूरत होगी। इसी तरह यदि आम ब्रिटिश की जीवनशैली अपना ली जाए तो हर साल 2.75 पृथ्वी की जरूरत होगी। वर्ष 2030 तक पूरी दुनिया की जरूरतें इतनी बढ़ जाएंगी कि उन्हें पूरा करने के लिये दो पृथ्वी की जरूरत होगी।

दुनिया का 44 फीसदी उपभोग सिर्फ चीन-अमेरिका में ही
चीन की बढ़ती आबादी और अमेरिकियों की जीवनशैली के कारण ये दोनों देश ही पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों पर सबसे बड़ा भार डाल रहे हैं। ग्लोबल फुटप्रिंट नेटवर्क के मुताबिक संसाधनों की मांग के हिसाब से चीन की हिस्सेदारी 23 फीसदी और अमेरिका की 21 फीसदी है। पृथ्वी के संसाधनों के इस्तेमाल में 44 फीसदी भागीदारी तो इन दो देशों की ही हो जाती है। बाकी दुनिया के लोगों की मांग बचे 56 फीसदी में से पूरी करनी होती है।

पृथ्वी पर चीन का प्रति व्यक्ति भार (2.21 जीएचए) कम है, लेकिन पूरी आबादी को मिलाकर यह भार बढ़ जाता है। अमेरिका में प्रति व्यक्ति खपत ही अधिक है। वहां प्रति व्यक्ति का पृथ्वी पर भार 9 जीएचए है जो कि अमेरिका के साढ़े सत्रह फुटबाल मैदान के बराबर है। यानि एक अमेरिकी की लकड़ी, पानी, ऊर्जा, मांस-मछली जैसी जरूरतों व इनसे निकलने वाले कार्बन कचरे को खपाने के लिए जितनेसंसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है वह इन मैदानों के बराबर उत्पादक क्षमता रखते हैं।

धरती बचाने को क्या कर सकते हैं आप
भोजन की बर्बादी रोकें: संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक कुल उत्पादन का एक तिहाई करीब 1.3 अरब टन खाना हर साल बर्बाद हो जाता है।
जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाएं : परंपरागत और स्थानीय उत्पादों की खेती से धरती की उर्वरा शक्ति को बचाए रखा व पैदावार को बढ़ाया जा सकता है। पृथ्वी की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
जैविक खेती : खतरनाक रसायनों और कीटनाशकों की जगह जैविक (आर्गेनिक) खेती अपनाने से खाद्य उत्पादों की पौष्टिकता बनी रहेगी। खेतों की उर्वरा शक्ति व सेहत को भी फायदा।
किचन गार्डन : शहरों में गार्डन फार्मिग जैसे नए तरीके अपनाएं जाएं। हरियाली के साथ उन शहरी गरीबों को भी विकल्प मिलेगा जो अपनी आय का 80 फीसदी खाने पर खर्च करते हैं।
किसान : खेतों ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए व बरसाती पानी के संरक्षण के तरीके अपनाए जाएं। जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ने के साथ सिंचाई भी अच्छी हो सकेगी।
पेड़ लगाएं: अपने घर, स्कूल, कॉलेज, दफ्तर के आसपास ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं। यह कार्बन का प्रदूषण घटाने में कारगर है।

इस तरह से आप कर सकते हैं मदद
कम खरीदारी:
वही नया उत्पाद खरीदें जो बहुत ही जरूरी हो। फालतू खरीदी गई चीजें जेब के साथ पर्यावरण के लिए भी खतरा हैं। इससे बचें। 
दान की आदत : खुद के लिए बेकार हुई किसी भी चीज को फेंकने के बजाय दान करें। पुराने कपड़े, खिलौने, जूते, किसी जरूरतमंद को दें।
वनस्पति उगाएं : आंध्र प्रदेश के किसानों ने खेतों में घास व दूसरे हरे पत्तेदार उत्पाद उगाए। इससे चारे का संकट दूर हुआ और दूध उत्पादन वृद्धि में भी मदद मिली। इससे खेतों को भी संरक्षण हुआ।
सार्वजनिक वाहनों का प्रयोग: स्कूटर-कार की जगह सिटी बस, मेट्रो जैसे सार्वजनिक वाहनों का ज्यादा प्रयोग करें। इससे ईंधन बचत के साथ-साथ प्रदूषण भी कम होगा
कूड़ा कम से कम : रिसाइकिल उत्पादों के इस्तेमाल से धरती पर कूड़ा कम किया जा सकता है। ऐसे उत्पादों का प्रयोग न करें जो रिसाइकिल न हो सकें।
बिजली की बचत - ऊर्जा खपत वाले उपकरणों का बेवजह प्रयोग रोकें, इससे ऊर्जा बचेगी।

पृथ्वी पर कौन कितना भार डाल रहा है
देश                     संसाधनों          संसाधनों             भार
                          का उपभोग      की क्षमता          कितना

सं अरब अमीरात 10.67                0.85                -9.8
(दुनिया में पहले नंबर पर है। इसमें सबसे ज्यादा योगदान कार्बन उत्सजर्न का 8.1 जीएचए रहा। यानि सुख-सुविधा के लिए संसाधनों के इस्तेमाल में अत्यधिक प्रदूषण फैल रहा है। भरपाई के लिए नौ अमीरात की जरूरत हर साल)

अमेरिका                7.99                 3.87                 -4.12
(पांचवें स्थान पर है। सबसे ज्यादा योगदान कार्बन उत्सजर्न का 5.57 जीएचए।)

चीन                         2.21                0.98                  -1.23
( 74 वें स्थान पर। सर्वाधिक योदगान कार्बन का 1.21 जीएचए)

भारत                       0.91                0.51                   -0.40
( दुनिया में 141वां स्थान। सर्वाधिक योदगान कार्बन का 0.33 जीएचए। चारागाह का 0 जीएचए, वन का 0.12 जीएचए, मछली पालन का 0.02 जीएचए, खेती का 0.39 जीएचए व जमीन पर इमारतों का जीएचए 0.05 जीएचए है)

पाकिस्तान                 0.76               0.43                    -0.33
( 145वां स्थान है। सर्वाधिक योगदान कार्बन का 0.26 जीएचए है)

तिमोर लेस्टे               -0.44              1.21                     0.77
( पूर्वी तिमोर भी, 152 देशों की सूची में अंतिम स्थान पर। कार्बन उत्सजर्न सिर्फ 0.07 जीएचए है। यहां इस्तेमाल की तुलना में संसाधन अधिक हैं)

1961 में आधी और पृथ्वी चाहिए थी
तब दुनिया की आबादी तीन अरब से ज्यादा थी और उस साल का इकोलॉजिकल फुटप्रिंट 2.4 व बायोकैपिसिटी थी 3.7। इस तरह पृथ्वी पर 0.63जीएचए यानि आधी पृथ्वी का अतिरिक्त भार पड़ा। 2007 में इकोलॉजिकल फुटप्रिंट 2.7 और बायोकैपिसिटी 1.8 थी। यानि इस साल दुनिया की जरूरतें इतनी ज्यादा थी कि उन्हें पूरा करने के लिये 1.51 पृथ्वी की और जरूरत थी।

जीवनशैली ऐसी है तो हर साल चाहिए ढाई पृथ्वी
अध्ययन से जुड़े संगठनों ने कई तरह के आंकड़े जुटाकर व्यक्ति विशेष का फुटप्रिंट निकाले हैं।

कुछ खास सवाल जो भारतीय जीवनशैली में आम हैं
# आप कितनी बार खाते हैं
-नियमित रूप से 
# मछली कितनी बार खाते हैं
- शाकाहारी, बिल्कुल नहीं 
# अंडा, दूध व डेयरी उत्पाद
- लगभग हर दिन की खपत
# कपड़ों व घरेलू चीजों पर मासिक खर्च
- दो हजार रुपये से ज्यादा 
# आपके घर में कितने लोग हैं
- आम तौर पर छह 
# घर कितना बड़ा है
- महानगरों में 90 से 150 वर्गमीटर सामान्य बात 
# घर को गर्म कैसे करते हैं
- गीजर व एसी सहित सबमें बिजली का इस्तेमाल सर्वाधिक 
# कार से हर सप्ताह सफर
- 80 किलोमीटर से ज्यादा
#कार का एवरेज कितना है
- 11 से 16 किलोमीटर लीटर 
# दूसरे की कार में जाते हैं
- कभी-कभी 
# सार्वजनिक परिवहन में यात्रा
- सप्ताह में 120 किलोमीटर से ज्यादा ही होता है
# हर साल हवाई यात्रा कितनी
-34 घंटे से अधिक

क्या है इकोलॉजिकल फुटप्रिंट
इंसानी जरूरतों को पूरा करने व इस दौरान उत्पन्न कचरे को खपाने के लिये पृथ्वी के कितने प्राकृतिक संसाधनों की जरूरत होगी। यानि सालभर में पृथ्वी पर कुल कितना भार डाला गया।

इकोलॉजिकल बायोकैपिसिटी
यह बताता है कि लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए संसाधनों व कचरे को सोखने की पृथ्वी की क्षमता कितनी है। यानि एक साल में जितने संसाधनों का लोगों ने इस्तेमाल किया है उन्हें फिर से बनाने के लिये पृथ्वी को कितने साल लगेंगे।

जीएचए
पृथ्वी की क्षमता व भार को जीएचए यानी ग्लोबल हेक्टेयर प्रति व्यक्ति की इकाई से बताया जाता है। इसमें अलग-अलग पैमानों पर देखा जाता है कि किस देश में कितनी जमीन पर इमारतें बनी हैं, कितनी मछली पालन, खेती व चराई के लिए इस्तेमाल हो रही है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:जीने के लिए कहां से लाएंगे 5 पृथ्वी-2 भारत