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पूर्व सैन्य अधिकारी को हत्या मामले में उम्र कैद

पूर्व सैन्य अधिकारी को हत्या मामले में उम्र कैद

पिछले वर्ष एक 13 वर्षीय बच्चे की हत्या करने वाले सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी के. रामाराज को एक त्वरित अदालत ने शुक्रवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अभियोजन पक्ष के एक वकील ने कहा कि न्यायालय ने लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) रामाराज (50) पर 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसमें से 50,000 रुपये पीड़ित के.दिलशान के परिवार को दिए जाएंगे।

न्यायाधीश ने रामाराज को हथियार अधिनियम की दो धाराओं के तहत भी दोषी पाया और दोनों के लिए अलग-अलग तीन वर्ष व एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई तथा 10,000 रुपये का जुर्माना भी किया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

आवासीय परिसर में प्रवेश करने के लिए बच्चों की हत्या की इस घटना पर देशभर में प्रतिक्रिया हुई थी। लोगों ने दोषी के खिलाफ सख्त सजा की मांग की थी।
 
फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दिलशान की मां के. कलैवानी ने न्यायालय परिसर में जमा संवाददाताओं से कहा, ''मैं खुश हूं। यह एक अच्छा फैसला है। यह हर किसी के लिए एक सबक होगा। इस तरह की घटना दुनिया में कहीं भी किसी के भी साथ नहीं घटनी चाहिए।''

अभियोजन पक्ष के वकील ने संवाददाताओं से कहा कि मामले की सुनवाई सितम्बर में शुरू हुई थी और 11 अप्रैल को समाप्त हो गई। न्यायालय ने इस दौरान लगभग 55 गवाहों के बयान दर्ज किए।

तमिलनाडु पुलिस ने बच्चों की हत्या के एक सप्ताह के भीतर ही मामले का पर्दाफाश कर दिया था।

पुलिस के अनुसार, रामाराज बच्चों के अपने आवासीय परिसर में घुसने से नाराज था, जो कि बादाम चुनने के लिए वहां चला गया था।

पुलिस ने आरोप लगाया था कि रामाराज ने अपने आवास की बालकनी से तीन जुलाई को अपराह्न् उस समय दिलशान को गोली मार दी थी, जब वह अपने मित्रों के साथ बादाम चुनने के लिए आवासीय परिसर में प्रवेश कर गया था।

दिलशान बुरी तरह जख्मी हो गया था और उसने एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था। रामाराज के तीन पुत्र सेना में कार्यरत हैं।

इस मामले की जांच अपराध शाखा-अपराध जांच विभाग (सीबी-सीआईडी) ने की। पुलिस को पहले किसी दूसरे अधिकारी पर संदेह था, लेकिन उस अधिकारी ने मामले में संलिप्तता से इंकार कर दिया और अंत में पुलिस रामाराज तक पहुंचने में सफल हुई।

पुलिस के अनुसार, पिछले वर्ष सेना से सेवानिवृत्त हुए रामाराज ने 2004 में उस समय एक 0.30 कैलिबर की स्प्रिंगफील्ड राइफल खरीदी थी, जब वह मध्य प्रदेश के जबलपुर में तैनात थे। राइफल के लाइसेंस की मियाद पूरी हो गई थी और रामाराज ने उसके नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था।

यहां सेना के अन्य अधिकारियों को पता नहीं था कि रामाराज के पास राइफल है। रामाराज ने बाद में राइफल को कूअम नदी में फेंक दिया था, जहां से पुलिस ने उसे बरामद कर लिया था।

 

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