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दो टूक

लोकतंत्र का तीन माह से जारी चुनावी महापर्व आज अपनी पराकाष्ठा को पाएगा। यह महाआरती का दिन है! प्रसाद में देश को पंद्रहवीं लोकसभा मिलेगी। राजनीतिक दलों की झोली में जनादेश गिरगा। कुछ अखाड़े जीत का ध्वज लहराएंगे। कुछ महारथी घाव सहलाएंगे। संधियों-दुरभिसंधियों का नया दौर भी चलेगा। लेकिन विजय-पराजय के इस महाद्वंद्व को एक महानगर निर्द्वद्व भाव से देखेगा। दिल्ली ने, न जाने कितनी सल्तनतों को आते-ााते देखा। सरकारं आईं और गईं। एक के बाद एक 14 लोकसभाओं का गठन हुआ। पर वह साक्षीभाव से देखती रही। गौर से देखिए। राजधानी दिल्ली इस देश की महान संवैधानिक व्यवस्था की प्रतीक है। खिलाड़ी बदलते हैं! महायोद्धा बदलते हैं! पर व्यवस्था वही रहती है! यही तो भारत राष्ट्रराज्य की जीत है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की जीत है! ं

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