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भारत ऐसी मिसाइल बनाने वाला दुनिया का चौथा देश

भारत ऐसी मिसाइल बनाने वाला दुनिया का चौथा देश

भारत गुरुवार को लम्बे समय से प्रतीक्षारत अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण कर मिसाइल शक्ति सम्पन्न राष्ट्रों के विशेष समूह में शामिल हो गया। अग्नि-5 लम्बी दूरी की परमाणु क्षमता युक्त बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 5,000 किलोमीटर से भी दूर के लक्ष्य को निशाना बना सकती है। इस मिसाइल को 'चाइना किलर' कहा जा रहा है।

ओडिशा के भद्रक जिले के व्हीलर द्वीप से यह परीक्षण किया गया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) प्रमुख वी.के. सारस्वत ने यहां परीक्षण स्थल पर संवाददाताओं को बताया कि मिसाइल का परीक्षण गुरुवार सुबह 8.07 बजे हुआ।

अमेरिका, रूस व चीन के बाद भारत ऐसा चौथा देश है जिसके पास इस तरह की मिसाइल है। भारत को अग्नि-5 मिसाइल को बनाने में चार साल का समय लगा।

देश के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख वी.के. सारस्वत ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''तीन चरणों वाली अग्नि-5 मिसाइल की पूरी क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन हुआ। मिशन से सम्बंधित सभी उद्देश्य व परिचालन लक्ष्य हासिल हुए हैं।''

उन्होंने कहा, ''भारत आज एक ऐसा राष्ट्र बन गया है जिसने लम्बी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का डिजाइन, उसका विकास व उत्पादन कर अपनी क्षमताओं को सिद्ध किया है। अब भारत मिसाइल शक्ति बन गया है।''

परीक्षण रेंज के निदेशक एस.पी. दाश ने आईएएनएस से कहा, ''यह अद्भुत परीक्षण था। मिसाइल ने बहुत सटीकता के साथ लक्ष्य को निशाना बनाया।''

गुरुवार के परीक्षण के दौरान 17.5 मीटर लम्बी अग्नि-5 मिसाइल को 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर ले जाया गया और उसे 7,000 मीटर प्रति सेकंड के वेग के साथ इस्तेमाल किया गया ताकि वह अपने लक्ष्य को निशाना बना सके।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लम्बी दूरी की परमाणु-क्षमता सम्पन्न बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण को देश की सुरक्षा तैयारियों व विज्ञान के क्षेत्र में नए आयाम तलाशने की दिशा में एक मील का पत्थर बताया।

सिंह ने सारस्वत को भेजे एक संदेश में कहा, ''मैं डीआरडीओ तथा अन्य संगठनों के सभी वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञों को बधाई देना चाहता हूं जिन्होंने देश की रक्षा और सुरक्षा को सशक्त बनाने के हमारे प्रयासों की दिशा में अथक प्रयास किया।''

उन्होंने कहा, ''अग्नि-5 का आज का सफल परीक्षण हमारी सुरक्षा और तैयारियों तथा विज्ञान की सीमाओं को जानने की हमारी जद्दोजहद की दिशा में एक और मील का पत्थर है। वैज्ञानिक समुदाय का सम्मान करने के लिए पूरा देश एक साथ खड़ा है।''

लेकिन चीन की ओर से अग्नि-5 परीक्षण को विपरीत प्रतिक्रिया मिली है। वहां राज्य संचालित 'ग्लोबल टाइम्स' के सम्पादकीय पृष्ठ पर कहा गया है कि भारत के पास चीन के ज्यादातर हिस्सों के लक्ष्यों तक पहुंच सकने वाली मिसाइलें हो सकती हैं लेकिन समग्र हथियारों की दौड़ में वह चीन के सामने कहीं नहीं टिकता।

इसमें कहा गया है कि भारत सरकार को इससे और दुश्मनी के अलावा कुछ नहीं मिलेगा।

लेख में कहा गया, ''भारत मिसाइल भ्रम में बहा जा रहा है।'' इसमें कहा गया है कि भारत वैश्विक अंतर-महाद्वीपीय मिसाइल क्लब में शामिल होने के सपने देख रहा है जबकि इसके लिए सामान्यतौर पर 8,000 किलोमीटर की मारक क्षमता होना जरूरी है।

डीआरडीओ की ओर से अग्नि-5 के सफल परीक्षण की घोषणा किए जाने के तुरंत बाद रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने सारस्वत व अग्नि-5 परियोजना के निदेशक अविनाश चंदर से बात की और उन्हें इस सफलता के लिए बधाई दी।

एंटनी ने इस परीक्षण को देश के मिसाइल कार्यक्रम में मील का पत्थर बताया और कहा कि राष्ट्र को अपने रक्षा वैज्ञानिकों पर गर्व है। उन्होंने डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख एम. नटराजन के अथक योगदान को भी याद किया।

अग्नि-5 की क्षमता अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) की मारक क्षमता से 500 किलोमीटर कम है। दुनियाभर में आईसीबीएम के लिए 5,500 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता मान्य है।

अग्नि-5 को 2014 के अंत तक सशस्त्र बलों में शामिल किए जाने से पहले उसे परीक्षणों की एक श्रृंखला से गुजारा जाएगा। लेकिन यह मिसाइल भारत को चीन में अंदर तक व पूरे पाकिस्तानी क्षेत्र में लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता प्रदान करती है।

वैसे भारत परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल न करने की अपनी नीति पर कायम है। अग्नि-5 व नवंबर 2011 में परीक्षण की गई अग्नि-4 मिसाइलें भारत के दुश्मनों के सामने उसके खिलाफ परमाणु हमले के लिए बाधा खड़ी करती हैं।

भारत के पड़ाेसी चीन के पास 11,500 किलोमीटर मारक क्षमता वाली अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल डेंग फांग-31ए है, जो दक्षिण एशिया में कहीं भी निशाना साध सकती है।

इस परियोजना की खास बात यह है कि अग्नि-5 कार्यक्रम से महिला मिसाइल वैज्ञानिक टेसी थॉमस जुड़ी हुई हैं। इस परियोजना में वह निदेशक अविनाश चंदर के बाद दूसरे नंबर पर हैं। थॉमस ने अग्नि-4 मिसाइल कार्यक्रम का नेतृत्व किया था।

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