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दो टूक

विदाई की भावुक नमी में जीत का एक चुटकी नमक घुल जाये तो यही होता है। पनीली भावनाएं नमकीन हो जाती हैं और आसमां थोड़ा और झुक कर पलकों पे बैठा लेने को बेताब। जी हाँ, यह सौरभ गांगुली की विदाई है,कोई खेल नहीं। विदाई जीत के उस दादा की जो आस्ट्रेलिया को आस्ट्रेलिया में पीट कर आता है। अंग्रेजों के भद्र स्टेडियम में अपने जज्बात दबाता नहीं बल्कि साथियों के चौकों-छक्कों पर टी-शर्ट उतार कर हवा में लहराता है। जिसकी रहनुमाई में 14 खिलाड़ियों का झुंड ‘टीम इंडिया’ हो जाता है। जो जीते गए मैचों की एसी झड़ी लगाता है कि बस गिनते रह जाओ। जो ‘टीम-निकाला’ मिलने पर टूटता नहीं। लड़ता है। टीम में वापसी करता है। दादा तुम वाकई ग्रेट हो। तुम्हारा आना, तुम्हारा होना और तुम्हारा जाना हम हमेशा याद रखेंगे।

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