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राज्यों के साथ मिलकर काम करेंगे: प्रधानमंत्री

राज्यों के साथ मिलकर काम करेंगे: प्रधानमंत्री

राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केन्द्र  (एनसीटीसी) पर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की ओर से उठायी गयी आपत्तियों के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि आतंकवादी संगठन पहले से कहीं अधिक सक्रिय और घातक हो गये हैं, इसलिए हमें आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए मिलजुलकर समन्वित प्रयास करने होंगे।

आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए सिंह ने कहा कि इस बात पर कोई सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता कि आतंकवाद से निपटने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्यों के तंत्र की है। केन्द्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर काम करने को तत्पर है और उन्हें वे सभी प्रभावी संस्थागत साधन देने को तैयार हैं, जिनकी उन्हें इस समस्या का सामना करने के लिहाज से आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा के अन्य मामलों की तरह आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए हमें संयुक्त और समन्वित प्रयास की जरूरत है, फिर चाहे उसका उद्गम देश में हो या देश से बाहर और चाहे उसकी प्रेरणा कोई भी हो। यह ऐसा संघर्ष है, जिसमें हम आराम से नहीं बैठक सकते।

उन्होंने कहा कि पिछले साल फरवरी से लेकर अब तक आंतरिक सुरक्षा की स्थिति कुल मिलाकर संतोषजनक रही है। इसके लिए राज्यों और केन्द्र की सरकार के प्रयासों की सराहना करने की जरूरत है।

आतंकवाद, वामपंथी उग्रवाद, धार्मिक कट्टरता और जातीय हिंसा को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती मानते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इन चुनौतियों से कड़ाई, किन्तु संवेदनशील ढंग से निपटना होगा और लगातार सतर्क रहना होगा।

सिंह ने कहा कि यदि हमें आतंकवाद को परास्त करना है या इससे प्रभावशाली ढंग से निपटना है तो समय पर सही खुफिया जानकारी प्राथमिक आवश्यकता है। इस दिशा में कुछ प्रगति हुई है। खुफिया सूचनाएं एकत्र करने का तंत्र मजबूत हुआ है।

सिंह ने कहा कि जैसा कुछ मुख्यमंत्रियों ने सुझाव दिया था, हम पांच मई को अलग बैठक में राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केन्द्र पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा हालात कुल मिलाकर संतोषजनक हैं, लेकिन और अधिक करने की जरूरत है। आंतरिक सुरक्षा की गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं। आतंकवाद, वामपंथी उग्रवाद, धार्मिक कट्टरता और जातीय हिंसा के खतरे हमारे देश में विद्यमान हैं।

उन्होंने कहा कि हमें अपनी ओर से इन चुनौतियों के प्रति लगातार सतर्क रहना होगा। इन चुनौतियों से कड़ाई से निपटने की आवश्यकता है, लेकिन पूरी संवेदनशीलता के साथ।

सिंह ने वामपंथी उग्रवाद की मिसाल देते हुए कहा कि जहां तक माओवादियों की हिंसा में मारे गये लोगों का सवाल है, 2011 के हालात 2010 की तुलना में बेहतर रहे। लेकिन हमें अभी भी लंबा रास्ता तय करना है।  दोनों ही तरह से प्रभावित क्षेत्रों की जनता को हमारी विकास कर रही अर्थव्यवस्था और समाज में शामिल कर और उन्हें सुरक्षा मुहैया कराकर।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था के लिहाज से जम्मू-कश्मीर के हालात काफी सुधरे हैं। परिणामस्वरूप राज्य में 2011 के दौरान पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की संख्या काफी बढ़ी है। वहां पंचायत चुनाव सफल रहे और इससे पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर की जनता हिंसा और आतंकवाद के साये से निकलकर सामान्य जीवन जीने की इच्छा रखती है।

सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के कुछ राज्यों में स्थिति जटिल बनी हुई है। जहां तक हिंसक वारदात का सवाल है, कुछ सुधार आया है, लेकिन शांति बहाल करने और जातीय एकता के बहाने अतिवादी समूहों और आतंकवादियों द्वारा धन वसूली, अपहरण और ऐसे ही अन्य अपराधों के खात्मे के लिए अब भी बहुत कुछ करना बाकी है।

उन्होंने कहा कि उग्रवादी समूहों द्वारा विकास के लिए दी गयी निधियों की चोरी से उन कोशिशों को धक्का लग रहा है, जो हम उस क्षेत्र के लोगों के रहन सहन में सुधार के लिए कर रहे हैं। आपसी झड़प भी असुरक्षा का स्रोत बनी हुई है।

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