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हमारा जोर अब कृषि की गुणवत्ता पर : नीतीश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को एसके मेमोरिएल हॉल में कृषि विभाग के श्रीविधि अभियान 2012 का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने फिर बिहार को विशेष राज्य की मांग दुहराई। सीएम ने कहा कि  बिहार कृषि प्रधान राज्य है और यहां कृषि पर आधारित उद्योग ही लगेंगे। हमें विशेष राज्य का दर्जा मिलेगा तो निवेशकों को छूट मिलेगी। योजनाओं में राज्य का अंशदान कम हो जाएगा, जिससे हम अधिक योजनाएं ले पाएंगे।

कुमार ने कहा कि कृषि के विकास से ही राज्य का विकास होगा। किसानों की आमदनी बढ़ेगी तभी समृद्धि आएगी और हम गरीबी रेखा को पार पाएंगे। श्री विधि खेती की एक नई और वैज्ञानिक तकनीक है। इसपर कुछ वर्षो से हमलोग जोर दे रहे हैं। इससे उत्पादन और उत्पादकता दोनों बढ़ी है। किसानों ने श्री विधि से धान का 224 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और जैविक खाद से 776 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आलू पैदा कर विश्व रिकार्ड बनाया है।

गेहूं के उत्पादन में भी राष्ट्रीय रिकार्ड बना है और अब अन्तर्राष्ट्रीय रिकार्ड बनेगा। तरक्की इसी को कहते हैं। बिहार सिर्फ आत्मनिर्भर ही नहीं बनेगा बल्कि देश की खाद्य जरूरतों को पूरा करेगा। हमें अब गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा ताकि हर भारतीय की थाली में बिहारी व्यंजन हो। इसके लिए जैविक खेती पर जोर है। हमारे किसानों ने बिना रासायनिक खादों के उम्दा उत्पादन से इसे भी साबित किया है। किसानों में उत्साह और उमंग पैदा हुआ है।

सरकार का काम है इनके कार्यो को बढ़ावा देना। ऐसे कार्यक्रम लागू करना जिससे वे सहज महसूस कर सकें। कृषि रोडमैप में कृषि के विकास के लिए ढांचा तैयार कर लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है, इसी के मुताबिक कार्य होगा। उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाकर कृषिकार्य में लगे लोगों की आय बढ़ायी जा रही है। कृषि कार्य के लिए बिजली का अलग फीडर दिया जाएगा। फसल, मछली, दुग्ध-मछली-फल, सब्जी उत्पादन, दलहन, तेलहन का उत्पादन बढ़ाकर हम इन्द्रधनुषी क्रांति ला रहे हैं।

अनाज के भंडारण और अधिप्राप्ति की विशेष व्यवस्था की गई। 21 लाख टन से ज्यादा धान की खरीद की गई। अधिप्राप्ति के एक-एक चरण को हमने बारीकी से देखा। राज्य खाद्य निगम, पैक्स को सक्षम बनाने के लिए सहकारिता बैंक को चार-चार सौ करोड़ की राशि दी गई। केन्द्रीय वित्तमंत्री कहते हैं कि दूसरी हरित क्रांति पूर्वी षेत्र से आएगी पर बजट में इस क्षेत्र को 1000 करोड़ देते हैं।

बिहार को बमुश्किल इसमें 100-125 करोड़ मिलेंगे। हमने उन्हें आमंत्रित भी किया था। खैर हम बैठे नहीं हैं। अपने बूते आगे बढ़ रहे हैं। हमारी रणनीति है टिकाऊ और समेकित खेती, मिट्टी के स्वास्थ पर ध्यान देना। खिर्फ खेतों में ही नहीं बिहार के लोगों के जीवन में भी हरियाली आए। तभी बिहार कृषि क्षेत्र में देश का अगुआ और मार्गदर्शक बनेगा।

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