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बिट्टु बॉस

बिट्टु बॉस


कलाकार: पुलकित सम्राट, अमिता पाठक
निर्देशक: सुपवित्र बाबुल
निर्माता: कुमार मंगत पाठक, अभिषेक पाठक्र
संगीत: राघव सच्चर
गीत: कुमार, लव रंजन, असीम अहमद अब्बासी

एक कम पैसे वाला, कम पढ़ा-लिखा, लेकिन मस्तमौला, दिलदार लड़का। उसे मिलती है एक परिपक्व सुलझी हुई अमीर लड़की। दोनों में हो जाता है प्यार। मगर बीच में आ जाती है पैसे की दीवार। लड़की के बराबर पहुंचने की चाह में लड़का चल पड़ता है गलत रास्ते पर, लेकिन उसका जमीर आड़े आ जाता है। फिर कुछ गलतफहमियां और आखिर में सब ठीक यानी हैपी एंडिंग!

अब देखा जाए तो इस कहानी में कुछ नया भले न हो, लेकिन इतना मसाला तो है कि इस पर एक अच्छी फिल्म बनाई जा सके। इस फिल्म से अपनी शुरुआत कर रहे लेखक-निर्देशक सुपवित्र बाबुल ने इस कहानी को एक अलग अंदाज में कहने की जो कोशिश की, वह सराहनीय है, मगर यह भी सच है कि अपनी इस कोशिश में वह पूरी तरह से सध नहीं पाए।

पंजाब के आनंदपुर शहर का स्टार वीडियोग्राफर है बिट्टू। खुशी का कोई भी मौका हो, वीडियो बनाएगा तो सिर्फ बिट्टू। अपने काम का बॉस है वह। उसका मानना है कि वह कैमरे में लोगों को नहीं, उनकी खुशी के पलों को कैद करता है।

एक अमीर लड़की से हुई दोस्ती और उसके बराबर पहुंचने का ताना सुन कर बिट्टू एक शॉर्टकट अपना तो लेता है, लेकिन अपने जमीर की सुन कर जल्द ही लौट भी आता है।

फिल्म की कहानी में जान है और टुकड़ों में यह लुभाती है, मन को छूती है, सोचने पर भी मजबूर करती है। लेकिन यह बात पूरी फिल्म पर लागू नहीं होती। इसकी वजह है इसकी स्क्रिप्ट का बार-बार ढीला पड़ जाना। दमदार डायलॉग की कमी भी इसे हल्का ही बनाती है।

इस कहानी के तमाम किरदार कायदे से रचे गए हैं। जिसकी जो खासियत है, कमोबेश वह उस पर टिका रहता है। यही वजह है कि फिल्म स्वीट लगती है।
कहानी भी अपने आसपास की ही नजर आती है। बिट्टू जैसे कितने ही युवक हैं, जो अमीर बनने के लिए शॉर्टकट अपनाने से नहीं चूकते। लेकिन फिल्म साफतौर पर यह सीख देती है कि अपने जमीर की सुनने वाले लोग गलत रास्तों से दूर
रहना जानते हैं।

पुलकित सम्राट ने बिट्टू के किरदार से दमदार शुरुआत की है। उन्होंने इस रोल को बेहद कॉन्फिडेंस के साथ तो निभाया ही है, साथ ही इसके लुक और स्टाइल को भी सलीके से कैरी किया है। अमिता पाठक अपने रोल में फिट दिखी हैं। उनके पास हिन्दी फिल्मों की ट्रेडिशनल हीरोइन सरीखा सौंदर्य या अपील भले ही न हो, मगर अपना काम करने की कला जरूर है। वर्मा जी बने राजेंद्र सेठी हर बार की तरह जंचे हैं। दो और कलाकारों का जिक्र जरूरी है। एक तो छोटे लाल पांडेय बने साहिल वैद्य हैं और दूसरे हैं अशोक पाठक, जो हीरो के असिस्टेंट विक्की के रोल में हैं। काफी अच्छा काम किया है इन दोनों ने।

राघव सच्चर के संगीत में पंजाबियत की महक है। गानों के शब्द भी स्थितियों के साथ सार्थक लगते हैं। सिनेमेटोग्राफी काफी अच्छी है। बतौर निर्देशक सुपवित्र का काम बुरा नहीं है, बस पटकथा कहीं-कहीं ढीली न पड़ती और वह फिल्म में थोड़ी कसावट और रफ्तार ले आते तो फिल्म और बेहतर हो सकती थी। फिर भी एक बार देखने के लिए यह बुरी नहीं है। इस फिल्म के प्रोमो भी युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय हुए थे। खासतौर से यू-टय़ूब पर। अब देखते हैं कि फिल्म कितनी लोकप्रिय होती है।

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  • Web Title:बिट्टु बॉस