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निजी मामलों में न हो कानून का दुरुपयोग: कोर्ट

निजी मामलों में न हो कानून का दुरुपयोग: कोर्ट

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को कहा कि आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश देने के अदालत के अधिकार का दुरुपयोग वादियों द्वारा अपने निजी मामलों को सुलझाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने एक व्यक्ति का फ्लैट कथित तौर पर हड़पने के मामले में एक प्रोपर्टी डीलर के खिलाफ पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नविता कुमार बाघा ने केनरा बैंक के पूर्व बैंक प्रबंधक कालीचरण की याचिका पर प्रोपर्टी डीलर के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश देने से इनकार कर दिया।

वर्ष 2004 में केनरा बैंक से सेवानिवत्त हुए कालीचरण ने प्रोपर्टी डीलर सुरेश गोयल के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की थी। उन्होंने गोयल पर जाली दस्तावेजों के आधार पर अपना फ्लैट हड़पने का आरोप लगाया था। बैंक अधिकारी ने अदालत में आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 156 (3) के तहत गुहार लगाई थी जो एक न्यायिक मजिस्ट्रेट को मामले में जांच का आदेश देने का अधिकार देती है।

अदालत ने कहा कि पक्षों को सीआरपीसी की धारा 156 (3) के प्रावधानों का इस्तेमाल अपनी सुविधा के हिसाब से, अपने निजी झगड़ों के लिहाज से व्यक्तिगत मामलों को सुलझाने के लिए करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

 

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