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राजरंग

रांची की शान-सड़क जामबंबई के बार में सुना था- यह हादसों का शहर है। रांची के बार में शायद आपको पता है या नहीं, इसे सड़क जाम का शहर कहा जाता है। जिधर देखिये उधरे जाम। सुबह जाम, दोपहर को जाम और शाम को जाम। जाम, जाम और जाम। अलबत तरक्की हुई है रांची की। रांची जब से राजधानी कहलाने लगी है, यह खूब इठला रही है। लोग इसकी सड़क पर फर्राटे से नहीं भागते, रंगते हैं। सुबह और शाम तो एकदम चीटीं की तरह गति हो जाती है ट्रैफिक की। इसलिए सरकार ने एक अदद पुलिस कप्तान खाली ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए बहाल किया है। लेकिन बेचार उ भी का करं। कैसे कंट्रोल करं। जो अनकंट्रोल्ड हो चुका है, उसको कैसे कंट्रोल करं। अब का करं बेचार, शहर को रबर की तरह खींचकर फैला तो सकते नहीं हैं। न सड़क को लंबा कर सकते हैं। शहर में जने देखिये तने बिल्डिंगे- बिल्डिंग। सड़क पर ठेलम-ठेल गाड़ी। मोटरसाइकिल से लेकर कार। आपको शहर के एक छोर से दूसर कहीं जाना हो तो हाथ में पौना- एक घंटा समय हाथ में लेकर चलिये। नय तो फंस जाइयेगा। फाीरे-फाीर निकलेंगे तइयो जाम मिलेगा। शाम को कहीं निक लेंगे तो फंस जाइयेगा। यह झारखंड की तरक्की की निशानी है। रांची का जाम, रांची की शान है।

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