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वेतन वृद्धि रुकीड्ढr रांची। पेयजल और स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता शुकदेव सुबोध गांधी दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता बरतने सहित कई आरोपों के दोषी पाये गये हैं। उनकी तीन वेतन वृद्धि रोकने की सजा दी गयी है। इसका उल्लेख वर्ष 2005-06 के उनके गोपनीय चारित्रिक में भी करने का निर्देश दिया गया है। जून 2005 में पूर्वी सिंहभूम के तत्कालीन डीसी ने खिलाफ शिकायत की थी। इसमें प्रशासन से असहयोगात्मक व्यवहार करने की बात भी कही थी। उन पर नलकूपों की मरम्मत कार्यो का अनुश्रवण नहीं किये जाने, एमएनपी और पीएम योजना के तहत ड्रीलिंग कार्य पूरा होने के बाद भी नलकूपों का हेड स्थापित नहीं किये जा सकने और अखबारों में गलत विज्ञापन प्रकाशित करने का भी आरोप था। आरोपों पर गांधी से स्पष्टीकरण के बाद डीसी से प्रतिवेदन भी मांगा गया। दोनों की समीक्षा के बाद उन्हें दोषी पाया गया। अभी वह विभाग के मंत्रिमंडल निगरानी में पदस्थापित हैं। तब वे आदित्यपुर में थे। पे रिवीजन पर अब 1ो बैठेंगी यूनियनेंड्ढr संवाददाता रांची कोयला कामगारों के पे रिवीजन पर अब 1नवंबर को सभी श्रमिक यूनियनें दरभंगा हाउस स्थित एनसीओइए ऑफिस में बैठेंगी। पहले यह बैठक कोलकाता में 12 को होनी थी। सीटू के डीडी रामानंदन ने बताया कि इसमें आंदोलनात्मक रणनीति भी तय हो सकती है। संगठन का मानना है कि प्रबंधन बेवजह इसे लटका रहा है। समझौते में प्रबंधन के अलावा सीटू, इंटक, एचएमएस, एटक और बीएमएस के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। कामगारों का पे रिवीजन जुलाई 2006 से लंबित है।ड्ढr श्रमिक संगठन लोकसभा चुनाव से पहले पे रिवीजन कराना चाहते हैं। इसके लिए सभी केंद्र सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं। उक्त बैठक में इसके मद्देनजर ही कुछ निर्णय होने की संभावना है। वैसे चेयरमैन पार्थ एस भट्टाचार्य का कहना है कि रिवीजन के लिए आंदोलन करना उचित नहीं है। वह खुद केंद्र सरकार के रहते रिवीजन हो जाने के पक्ष में हैं। इस पर कार्रवाई भी चल रही है।ड्ढr हठ के कारण लटका है रिवीजन : बाबूलालड्ढr रांची। द झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन के अध्यक्ष सह पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने कहा कि श्रमिक प्रतिनिधियों के हठ के कारण कामगारों का पे रिवीजन लटका हुआ है। देश के लगभग सभी पीएसयू में दस वर्षो का समझौता हुआ है। हाल ही में टाटा में भी यही हुआ। कामगार की भावना के मद्देनजर हठ त्याग देना चाहिए। लोकसभा चुनाव से पहले पे रिवीजन कर लेना चाहिए। इस क्रम में अधिकारियों के वेतनमान और सुविधा को ध्यान में रखना चाहिए। स्थिति को देखते हुए ही 10 वर्षो के लिए यूनियन ने न्यूनतम बेसिक 27000 मांगा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए बाहरी प्रतिनिधियों को खुद समझौते से हट जाना चाहिए।ड्ढr ं

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