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उग्रवाद की समस्या पर उल्फा ने की सरकार से चर्चा

उग्रवाद की समस्या पर उल्फा ने की सरकार से चर्चा

असम में तीन दशक से चली आ रही उग्रवाद की समस्या का स्थायी हल खोजने के इरादे से उल्फा के शीर्ष नेताओं ने सोमवार को सरकार से अपने मांग पत्र पर चर्चा की। उल्फा अध्यक्ष अरविन्द राजखोवा के नेतृत्व में उसके प्रतिनिधिमंडल की केन्द्रीय गृह सचिव आर के सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से करीब डेढ घंटे बैठक चली।
   
आर के सिंह ने कहा कि बातचीत काफी सार्थक और रचनात्मक रही। मुझे लगता है कि हमने अच्छी प्रगति की है। राजखोवा ने कहा कि हमने असम की शांति और विकास से जुडे सभी मुद्दों पर चर्चा की है। हम इस बात पर सहमत हुए हैं कि वार्ता प्रक्रिया को आगे बढाया जाएगा।
   
यह पूछने पर कि बातचीत में कौन कौन से मुद्दे उठे, सिंह ने बताया कि उल्फा नेताओं ने असम के मूल लोगों की सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाये लेकिन इस बारे में विस्तार से चर्चा अगले दौर की बैठक में होगी।
   
सूत्रों ने बताया कि उल्फा कैडरों द्वारा हथियार डालने और वार्ता समर्थक गुट के खिलाफ सुरक्षाबलों द्वारा कार्रवाई पूरी तरह बंद करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक में उल्फा के मांगपत्र पर प्रमुखता से बातचीत हुई, जिसमें असम के मूल लोगों के अधिकारों के संरक्षण के सार्थक उपाय खोजने के लिए संविधान में संशोधन की बात है।
   
बैठक में असम सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। उल्फा के विदेश सचिव शशधर चौधरी ने कहा कि सभी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई है।
   
चौधरी ने बताया कि उन्होंने सरकार से उल्फा के महासचिव अनूप चेतिया को स्वदेश लाने की मांग की जो इस समय बांग्लादेश की ढाका जेल में कैद है। चेतिया की वापसी को लेकर जल्द ही कोई कार्रवाई संभव है।
   
मांगपत्र में उल्फा ने नियम और कानून बदलने की मांग भी की है। उसका कहना है कि संविधान के मौजूदा प्रावधानों के तहत उनकी मांगों का समाधान संभव नहीं है। उल्फा की अन्य मांगों में करीब 50 लापता उल्फा नेताओं और कैडरों के बारे में स्थिति रपट पेश करना शामिल है।
   
लगभग 32 साल के हिंसक उग्रवादी अभियान के बाद उल्फा ने सरकार के साथ औपचारिक शांति वार्ता शुरू की। तीन सितंबर 2011 को उल्फा ने सरकार के साथ इस संबंध में एक समझौते पर दस्तखत किये। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृह मंत्री पी चिदंबरम के साथ फरवरी 2011 में राजखोवा ने शुरुआती बातचीत की थी। उन्होंने आठ सदस्यीय उल्फा टीम का नेतृत्व किया था।
   
उल्फा का भूमिगत कमांडर इन चीफ परेश बरूआ अभी भी सरकार के साथ किसी वार्ता के पक्षधर नहीं है।

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