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कल बहाल हुए, आज रिटायर हो गए

रामजतन, मुरारी लाल, सुधीर प्रसाद, सुगिया देवी..। ये वैसे मास्टर साहबान हैं जो कल बहाल हुए थे और आज रिटायर भी हो गए। यही नहीं, जो अब आज बहाल होंगे वे भी कल रिटायर हो जाएंगे। यह सच है राज्य में शिक्षकों की बहाली का। दरअसल हुआ यह कि वर्ष 2006 में जब शिक्षक बहाली हुई तो इनमें से कई सेवानिवृत्त होने की उम्र में पहुंच चुके थे। बहाल होते ही कोई दो तो कोई चार या छह महीन के अंदर ही रिटायर हो गए। ये सब बीएड किए हुए थे और इनके लिए बहाली नियमावली में उम्रसीमा निर्धारित नहीं थी।ड्ढr ड्ढr काफी लंबे अरसे से जिले ही नहीं बल्कि पूर सूबे में बीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थी शिक्षक बनने की आस लगाए हुए थे। इंतजार करते-करते उम्र ढल गई। पोता से दादा बन गए। जीवन का स्वर्णिम काल नौकरी पाने की चाह में निकल गया। कुछ तो परदेश नौकरी करने चले गए। लेकिन जब वर्तमान सरकार ने शिक्षक बहाली की घोषणा की तो सबके चेहर खिल उठे। नौकरी भी मिली। ये लोग दादा से मास्टर साहब कहलाने लगे। लेकिन इनके चेहर पर छाई मुस्कान ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी। क्योंकि नौकरी के कुछ दिनों पश्चात ही रिटायर हो गए। वर्ष 2006 में पहले चरण की शिक्षक बहाली में कई दादा-दादी और नाना-नानी भी शिक्षक बन गए और बहाली के छह महीने बाद ही सेवानिवृत्त हो गए। कई शिक्षक सेवानिवृत्त होने की लाइन में हैं। सालभर के अंदर इनकी भी सेवा समाप्त हो जाएगी। दूसर चरण की नियोजन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस बार भी अच्छी खासी संख्या में बुजुर्ग अभ्यर्थी फार्म भर रहे हैं। कई फिर से मास्टर साहेब कहलाएंगे। कुछ दिनों के बाद ये भी सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इससे स्कूलों में फिर से कई शिक्षकों के पद रिक्त हो जाएंगे। कुछ तो खाली हो चुके हैं। ये सब प्रशिक्षित शिक्षक हैं। बहाली में इनके लिए न तो पहले न अब ही उम्र का कोई बंधन है।

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