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बाढ़ पीड़ितों को सर्दी से बचाने में जुटे ये गुदड़ीवाले

म ही लोग होते हैं, जो अपना कष्ट भूल दूसरों के दर्द निवारण में पिल पड़ते हैं। यहां तो पूरा का पूरा कुनबा है, जो अपना रोी-रोगार दांव पर लगाकर बिहार के बाढ़पीड़ितों को आने वाली ठंढ़ से बचाने के लिए रात-दिन एक किये है। ये कहते हैं- खुले मैदान में कैंपों में जाड़े की रात कैसे कटती है, इसका अंदाजा हमें है। बिरसानगर और सोनारी के गुदड़ी बनाने वाले ये लोग इन दिनों अपना रोगार छोड़ बाढ़पीड़ितों के लिए गुदड़ियां तैयार कर रहे हैं। वही गुदड़ी, जिसे लोग काथा कहते हैं। न्यू एजूकेशन एंड इनवायरमेंट विजन (एनइइवी) नामक एनजीओ की ओर से इन्हें पुरानी साड़ियां दी गयी हैं। एनइइवी को मारवाड़ी महिला मंच की ओर से साड़ियां मिल रही है। मंच की अध्यक्ष जया डोकानिया के अनुसार जब उनके पास यह प्रस्ताव आया, तो सहर्ष उन्होंने स्वीकार कर लिया। अब तक उनकी ओर से दो साड़ियां संस्था को दी जा चुकी है। ढ़ाई सौ गुदड़ी की पहली खेप शुक्रवार को बिहार जायेगी। वहां गुंजन संस्था मधेपुरा के बाढ़ पीडित कैंपों में उनका वितरण करगी। एनइइवी की शिखा जन का कहना है कि जिस तरह से गुदड़ी बनानेवालों ने दिलेरी दिखायी, वह काबिले तारीफ है। पहले तो उन्होंने बदले में पैसे लेने से ही मना कर दिया था, लेकिन संस्था ने उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें कुछ आर्थिक मदद करने का फैसला किया है। सोनारी में गुदड़ी बना रही वृद्धा नानी की उम्र 60 वर्ष से ज्यादा है, बावजूद इसके, उसने 15 गुदड़ी तैयार कर ली है। नानी का कहना है कि ठंड का मौसम क्या होता है, किसी गरीब से बेहतर कौन जान सकता है। उसपर जिसके पास कुछ भी बचा न हो। नानी ने बताया कि गुदड़ी बनाने में 20 से ज्यादा लोग जुटे हुए हैं।

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  • Web Title: बाढ़ पीड़ितों को सर्दी से बचाने में जुटे ये गुदड़ीवाले