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हाउसफुल-2

हाउसफुल-2

10 में निर्देशक साजिद खान की ‘हाउसफुल’ आई थी। वह सुपरहिट थी। अब ‘हाउसफुल-2’ उसकी अगली कड़ी है। ‘हाउसफुल’ की तरह ‘हाउसफुल-2’ एक ‘माइंडलेस कॉमेडी’ है। इधर काफी दिनों से कोई हंगामी कॉमेडी नहीं आई थी। ‘हाउसफुल-2’ उस कमी को पूरा करती है। पिछली ‘हाउसफुल’ में अक्षय कुमार और रितेश देशमुख ने धमाल मचाया था। नई ‘हाउसफुल-2’ में इन लोगों के अलावा जॉन अब्राहम, असिन, जैक्लिन फर्नाडिस, जरीन खान और श्रेयस तलपड़े भी हैं। इन नए लोगों के प्रवेश ने ‘हाउसफुल-2’ की कॉमेडी में और भी निखार ला दिया है।

आजकल कॉमेडी फिल्म के लिए निर्माता-निर्देशक किसी सशक्त कहानी की जरूरत महसूस नहीं करते। स्थितियों के विद्रूप से वे पर्दे पर हास्य पैदा करने की कोशिश करते हैं। उनके लिए कहानी की स्पष्ट संरचना और चरित्रों का विकास कोई अर्थ नहीं रखता। वे तो ताबड़तोड़ विडंबनापूर्ण स्थितियों की रचना करके हास्य का सृजन करते चलते हैं।

इसलिए ‘हाउसफुल-2’ की कहानी में कोई जान नहीं है। फिल्म में उन चार पिताओं की कहानी कही गई है, जिन्हें अपनी चार बेटियों की शादी करनी है। इन चार लड़कियों से विवाह योग्य 4 लड़के भी हैं। उनमें से हर पिता चाहता है कि वह ऐसे लड़के से अपनी बेटी की शादी करे, जो दूसरे लड़के की तुलना में ज्यादा धनी हो। यह विडंबनापूर्ण स्थिति एक ऐसी अंतहीन कॉमेडी का निर्माण करती है, जिसके सहारे आप बिना बोरियत के फिल्म के ‘द एंड’ के शॉट तक पहुंच जाते हैं। हालांकि फिल्म के चर्चित कलाकारों की अति नाटकीयता कई बार उकताहट भी पैदा करती है, फिर भी अच्छे संपादन की वजह से कहानी की गतिशीलता बनी रहती है।

अक्षय कुमार ने अपनी एक्शन फिल्मों के दौर में भी दिलचस्प कॉमेडी की थी। ‘हाउसफुल-2’ में भी उन्होंने अपनी खास शैली की स्वाभाविकता बनाए रखी है। जॉन अब्राहम ने अपनी सहज कॉमेडी से फिल्म में ताजगी भर दी है। रितेश पिछली ‘हाउसफुल’ जैसे ही हैं-अपने अलग अभिनय शिल्प की तलाश में। श्रेयस तलपड़े के काम में गहराई है। असिन, जैक्लिन, शाजान और जरीन खान नई अभिनेत्रियों का एक नया दौर आ जाने की सूचना देती हैं। इनके अभिनय में कहीं भी अतिरिक्त भावुकता नहीं है। संवाद अदायगी में बेलौसपन है।

पुराने दौर के मिथुन चक्रवर्ती, रणधीर कपूर और ऋषि कपूर के अभिनय में कोई आकर्षण नहीं। वे अपने ही अतीत को बार-बार दुहराते हुए दिखे हैं, लेकिन बोमन ईरानी ने अपनी कॉमेडी का एक नया रूप जरूर पेश किया है।

फिल्म के आइटम नंबर में मलाइका अरोड़ा ने जरूर समां बांधा है। ‘अनारकली’ वाला यह गाना मलाइका का अब तक का सबसे अच्छा आइटम नंबर है। साजिद-वाजिद के संगीत में ताजगी है। निर्देशक साजिद खान पात्रों की भीड़ कम रखते तो फिल्म ज्यादा मनोरंजक लगती।

10 में निर्देशक साजिद खान की ‘हाउसफुल’ आई थी। वह सुपरहिट थी। अब ‘हाउसफुल-2’ उसकी अगली कड़ी है। ‘हाउसफुल’ की तरह ‘हाउसफुल-2’ एक ‘माइंडलेस कॉमेडी’ है। इधर काफी दिनों से कोई हंगामी कॉमेडी नहीं आई थी। ‘हाउसफुल-2’ उस कमी को पूरा करती है। पिछली ‘हाउसफुल’ में अक्षय कुमार और रितेश देशमुख ने धमाल मचाया था। नई ‘हाउसफुल-2’ में इन लोगों के अलावा जॉन अब्राहम, असिन, जैक्लिन फर्नाडिस, जरीन खान और श्रेयस तलपड़े भी हैं। इन नए लोगों के प्रवेश ने ‘हाउसफुल-2’ की कॉमेडी में और भी निखार ला दिया है।

आजकल कॉमेडी फिल्म के लिए निर्माता-निर्देशक किसी सशक्त कहानी की जरूरत महसूस नहीं करते। स्थितियों के विद्रूप से वे पर्दे पर हास्य पैदा करने की कोशिश करते हैं। उनके लिए कहानी की स्पष्ट संरचना और चरित्रों का विकास कोई अर्थ नहीं रखता। वे तो ताबड़तोड़ विडंबनापूर्ण स्थितियों की रचना करके हास्य का सृजन करते चलते हैं।

इसलिए ‘हाउसफुल-2’ की कहानी में कोई जान नहीं है। फिल्म में उन चार पिताओं की कहानी कही गई है, जिन्हें अपनी चार बेटियों की शादी करनी है। इन चार लड़कियों से विवाह योग्य 4 लड़के भी हैं। उनमें से हर पिता चाहता है कि वह ऐसे लड़के से अपनी बेटी की शादी करे, जो दूसरे लड़के की तुलना में ज्यादा धनी हो। यह विडंबनापूर्ण स्थिति एक ऐसी अंतहीन कॉमेडी का निर्माण करती है, जिसके सहारे आप बिना बोरियत के फिल्म के ‘द एंड’ के शॉट तक पहुंच जाते हैं। हालांकि फिल्म के चर्चित कलाकारों की अति नाटकीयता कई बार उकताहट भी पैदा करती है, फिर भी अच्छे संपादन की वजह से कहानी की गतिशीलता बनी रहती है।

अक्षय कुमार ने अपनी एक्शन फिल्मों के दौर में भी दिलचस्प कॉमेडी की थी। ‘हाउसफुल-2’ में भी उन्होंने अपनी खास शैली की स्वाभाविकता बनाए रखी है। जॉन अब्राहम ने अपनी सहज कॉमेडी से फिल्म में ताजगी भर दी है। रितेश पिछली ‘हाउसफुल’ जैसे ही हैं-अपने अलग अभिनय शिल्प की तलाश में। श्रेयस तलपड़े के काम में गहराई है। असिन, जैक्लिन, शाजान और जरीन खान नई अभिनेत्रियों का एक नया दौर आ जाने की सूचना देती हैं। इनके अभिनय में कहीं भी अतिरिक्त भावुकता नहीं है। संवाद अदायगी में बेलौसपन है।

पुराने दौर के मिथुन चक्रवर्ती, रणधीर कपूर और ऋषि कपूर के अभिनय में कोई आकर्षण नहीं। वे अपने ही अतीत को बार-बार दुहराते हुए दिखे हैं, लेकिन बोमन ईरानी ने अपनी कॉमेडी का एक नया रूप जरूर पेश किया है।

फिल्म के आइटम नंबर में मलाइका अरोड़ा ने जरूर समां बांधा है। ‘अनारकली’ वाला यह गाना मलाइका का अब तक का सबसे अच्छा आइटम नंबर है। साजिद-वाजिद के संगीत में ताजगी है। निर्देशक साजिद खान पात्रों की भीड़ कम रखते तो फिल्म ज्यादा मनोरंजक लगती।

कलाकार: अक्षय कुमार, असिन, जॉन अब्राहम, जैक्लिन फर्नाडिस, रितेश देशमुख, जरीन खान, श्रेयस तलपड़े, शाजान पद्मसी, मिथुन चक्रवर्ती, चंकी पांडेय, जॉनी लीवर, बोमन ईरानी, ऋषि कपूर और रणधीर कपूर
निर्देशक: साजिद नाडियाडवाला
निर्देशक: साजिद खान
संगीत: साजिद-वाजिद
गीत: समीर

पब्लिक कमेंट
मस्त मूवी है। हर कलाकार की एक्टिंग में दम है। हंसते-हंसते बुरा हाल हो गया। मजा आ गया। युसरा, छात्र

जॉन की एक्टिंग बहुत अच्छी लगी। असिन के अभिनय में दम नहीं है, पर जैक्लिन फर्नाडिस मस्त लगीं। देव, बिजनेसमैन

मिथुन चक्रवर्ती और अक्षय कुमार की एक्टिंग शानदार है। अनारकली डिस्को चली.. गाना मस्त है। योगेंद्र सिंह, पुलिस सेवा

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