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गुरु नानक शाह फकीर

गुरु नानक ने प्रेम और करुणा, भाईचारे और सदाचार का संदेश इतने प्रेरणादायक ढंग से दिया कि न केवल उनके जीवनकाल में लाखों लोगों ने इस संदेश को अपनाया अपितु इसकी इतिहास पर भी अमिट छाप पड़ी। पर गुरु नानक इससे भी एक कदम आगे आए और उन्होंने कर्मकांडों, कुरीतियों, विषमता और दोहरे मूल्यों पर तीखे प्रहार किए। मुख्य बात यह नहीं है कि इसमें उन्होंने कितनी निर्भिकता व साहस का परिचय दिया। मुख्य बात यह है कि लूटने वालों के सामने लूट का विरोध, अत्याचार करने वालों के सामने अत्याचार का विरोध व कर्मकांडों में लिप्त व्यक्ितयों के सामन कर्मकांडों का खुलेआम विरोध उन्होंने इस तरह से किया कि इस गलत राह पर चल रहे व्यक्ितयों को कम स कम कुछ हद तक लूट, अत्याचार व अंधविश्वासों की राह से पीछे हटना पड़ा। गुरु नानक के वचन सुनकर बाबर ने अन्यायपूर्ण ढंग से बंदी बनाए गए अनेक व्यक्ितयों की रिहाई का आदेश दे दिया। कर्मकांडों को सब कुछ समझने वाले धर्म के ठेकेदारों को अपनी गलती का आभास हुआ। पर गुरु नानक ऐसा कैस कर सके? किसी चमत्कार में तो उनका विश्वास था नहीं था। विरोधियों के हृदय-परिवर्तन की शक्ित बहुत कम महापुरुषों में होती है। यह अद्भुत सामथ्र्य प्राप्त करन का कोई शार्टकट नहीं है। इसके लिए एक ही राह है कि मनुष्य का हृदय भीतर की गहराई तक पूरी तरह साफ हो। अच्छी-अच्छी बातें बनान का कार्य ता कोई भी कर सकता है। बाहरी तौर पर अपना पहनावा संत-साधु जैसा कर सकता है, व योग-व्यायाम से शरीर को बहुत स्वस्थ कर सकता है। पर विचार और आचरण को पूरी तरह पवित्र करन के बाद और कथनी-करनी का अंतर पूरी तरह मिटान के बाद ही कोई मनुष्य उस स्थिति में पहुंचता है कि लाखों लोग यह कह उठें ‘गुरु नानक शाह फकीर, हिंदु का गुरु मुसलमान का पीर। पर आज कर्मकांड छोड॥कर हम वास्तव में उनके विचारों-कार्यो को कितना अपना रहे हैं।ं

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  • Web Title: गुरु नानक शाह फकीर