अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बोर्ड प्रमुख सहित छह पर होगी कार्रवाई

ोलकाता हाईकोर्ट ने बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर और पूर्व अध्यक्ष शरद पवार सहित चार अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने ये निर्देश जगमोहन डालमिया की बर्खास्तगी संबंधी केस में झूठे शपथ-पत्र फाइल करने के चलते दिए हैं। न्यायाधीश नादिरा पथारिया ने डालमिया के इस संबंध में पवार और अन्य बोर्ड अधिकारियों के खिलाफ याचिका दायर करने के 8 महीने बाद यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने एकपक्षीय आदेश सुनाते हुए रािस्ट्रार को आपराधिक दंड संहिता की धारा 1े तहत कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया। कोर्ट ने अपनी जांच में पाया कि ये शपथपत्र झूठे हैं और कोर्ट ने इसे न्यायालय की मानहानि के रूप में लिया। उस समय कोर्ट ने इस पर अपना निर्णय सुरक्षित रखा था। मनोहर और शरद के अलावा अन्य जिन लोगों पर कार्यवाही शुरू करने के लिए निर्देश दिए गए हैं उनमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी रत्नाकर शेट्टी, पूर्व सचिव निरांन शाह, सचिव एन. श्रीनिवासन और जूनियर क्रिकेट कमेटी के चेयरमैन चिरायु अमीन शामिल हैं। डालमिया के वकील ने याचिका में कहा था कि बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष को उस संशोधन के आधार पर निलंबित किया गया था जो कि रािस्ट्रार के पास रािस्टर ही नहीं कराया गया था। अपनी इस याचिका में डालमिया ने दावा किया था कि बोर्ड ने हाईकोर्ट के समक्ष बोर्ड के नियम-38 के क्लॉज-5, जिसके तहत बोर्ड सदस्य के खिलाफ आपराधिक मामला चलाया जा सकता है, संबंधी फर्ाी पत्र पेश किए। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने गलत तरीके से यह दावा किया कि उन्होंने तमिलनाडु सोसायटी’ज रािस्ट्रेशन में यह संशोधन रािस्टर करा दिया था। लेकिन यह समय निकलने के बाद रािस्टर हुआ था। जो भी संशोधन होता है उसका रािस्ट्रार के पास तीन महीने के अंदर-अंदर रािस्टर होना जरूरी होता है। डालमिया के वकील दायर याचिका में कहा था कि सितम्बर, 2000 में संशोधन होने के छह महीने बाद इसे रािस्टर कराया गया। उन्होंने कहा कि डालमिया के निलंबन के बाद इस संशोधन को रािस्टर कराया गया। डालमिया को 16 दिसम्बर, 2006 को बीसीसीआई से निलंबित किया गया था और बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र का दबाव डाला गया था। उस समय बोर्ड की ओर से जो कागजात कोर्ट में पेश किए गए थे उन पर रत्नाकर शेट्टी के हस्ताक्षर थे। डालमिया ने यह याचिका 20 जुलाई, 2007 को दायर की थी। उसी दिन हाईकोर्ट ने कह दिया था कि उनका बोर्ड से निलंबन अवैध है। (प्रे.ट्र.) उधर, क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों ने हाईकोर्ट के इस ऑर्डर पर अभी कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि बोर्ड के वकील इस मसले पर अपना पक्ष रखेंगे। बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष शरद पवार ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि क्या निर्णय आया है। मुझे अभी-अभी पता चला है कि कोर्ट ने एसा कोई निर्देश दिया है। इसलिए जब तक मैं पेपर देख नहीं लेता, वकीलों से सलाह नहीं कर लेता, तब तक इस बार में कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हूं।’ पवार ने आगे कहा, ‘हम तो यही विश्वास दिला सकते हैं कि हम माननीय कोर्ट के समक्ष सभी फेक्ट उपलब्ध कराएंगे।’ जब उनसे पूछा गया कि शपथ-पत्र सच्चे थे या झूठे, पवार ने कहा, ‘मैं कैसे कह सकता हूं। यह मेरा शपथ-पत्र नहीं था। मुझे नहीं पता कि किस शपथ-पत्र के पार में आप बात कर रहे हैं।’ बोर्ड के पूर्व सचिव निरांन शाह ने भी यही बात कही। उन्होंने कहा, ‘हमने इस बार में सुना है। बोर्ड के वकील इस मसले को देखेंगे।’ रत्नाकर शेट्टी ने कहा कि हमें इस बार में विस्तार से कोई जानकारी नहीं है। इस समय इस बार में कोई भी कमेंट करना ठीक नहीं होगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: बोर्ड प्रमुख सहित छह पर होगी कार्रवाई