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कैग के शिकंजे में फंसे विलासराव देशमुख

कैग के शिकंजे में फंसे विलासराव देशमुख

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने एक रिपोर्ट में एक ट्रस्ट को मुंबई में भूमि आवंटित किये जाने के मामले में केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख को दोषी ठहराया है जिसकी स्थापना उनके द्वारा की गई थी।
 
महाराष्ट्र विधानसभा में अभी यह रिपोर्ट पेश की जानी है। इसमें कहा गया है कि मानजारा चैरीटेबल ट्रस्ट को 28 सितंबर 2005 को सरकार ने उपनगरीय बोरीबली में 23,840 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की जब देशमुख राज्य के मुख्यमंत्री थे।

यह भूमि 6.56 करोड़ रुपये के अधिग्रहण कीमत पर डेंटल कालेज स्थापित किये जाने के लिए आवंटित की गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह पाया गया कि इसके लिए चार आवेदनपत्र थे जिसमें से मुख्यमंत्री ने मानजारा चैरीटेबल ट्रस्ट को चुना।
 
कैग की इस रिपोर्ट में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के अलावा, वर्तमान में कैबिनेट मंत्री नारायण राणे, छगन भुजबल, राधाकृष्ण विखे पाटिल और पतंगराव कदम को भी भूमि आवंटन मामले में दोषी पाया गया है।

 

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