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विज्ञान-अध्यात्म में विरोधाभास नहीं:कलाम

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एवं जन मुनि आचार्य महाप्रज्ञ का कहना है कि विज्ञान एवं आध्यात्म में कोई विरोधाभास नहीं है। वे जयपुर के अणुविभा केन्द्र में द फैमिली एण्ड द नेशन नाम की पुस्तक के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। यह पुस्तक डॉ. कलाम एवं जन मुनि आचार्य महाप्रज्ञ ने मिल कर लिखी है। डॉ. कलाम ने कहा कि विज्ञान एवं आध्यात्म का सहअस्तित्व भारत की महान विरासत है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक उनके और आचार्य महाप्रज्ञ के विचारों को एकरूप में प्रस्तुत करती है। आचार्य महाप्रज्ञ से अपनी मुलाकात एवं इस पुस्तक की रचना को अपने जीवन का एकदम अनूठा अनुभव बताते हुए डॉ. कलाम ने कहा कि इस पुस्तक का यह शीर्षक इसलिये रखा गया है क्यों कि उनका मानना है कि केवल वही व्यक्ति राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध रख सकता है, जिसे परिवार में सही मूल्य सिखाए गए हैं। डॉ कलाम ने कहा कि उन्हें एवं आचार्य को विश्वास है कि भारत में यह क्षमता है कि वह एक ऐसा राष्ट्र बने, जिसमें लोग गरीबी, भय, युद्ध और प्रदूषण के बिना जीवन बिता सकते हैं। बल्कि एक शांतिपूर्ण, समृद्ध, खुशहाल और सुरक्षित समाज की रचना के लिये भारत दुनिया का रोल मॉडल बन सकता है। उन्होंने कहा कि हम ऐसा कर सकते हैं लेकिन इसके लिये दिल में सच्ची भावना होनी जरूरी है। इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति ने दुनिया में शांति के लिये एक मंत्र भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि दिल में पवित्रता से खबूसूरत चरित्र का निर्माण होता है, चरित्र में खूबसरमी से घर में सद्भावना उत्पन्न होती है। घर में सद्भावना से राष्ट्र में अनुशासन और तदंतर दुनिया में शांति आएगी। उन्होंने कहा कि विज्ञान और आध्यात्म का सहअस्तित्व भारत की विरासत है। इस अवसर पर आचार्य महाप्रज्ञ ने अपने सम्बोधन में कहा कि आध्यात्म और विज्ञान पृथक दिशाओं में जाते प्रतीत होते हैं लेकिन गहराई से विवेचना करं तो उनमें कोई भेद नहीं है। दोनों एक ही दिशा यानि सत्य की खोज में में चल रहे हैं, बस रास्ते अलग-अलग हैं। आचार्य ने कहा कि इस पुस्तक में आध्यात्म एवं विज्ञान में सम्बन्ध दिखाने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम एक वैज्ञानिक हैं और वह खुद आध्यात्म के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। दोनों का साथ आना इस बात की पुष्टि करता है कि विज्ञान एवं आध्यात्म का मिलना मानवीय समस्याओं के हल के लिये नितांत जरूरी है। इस अवसर पर युवाचार्य श्री महाश्रमण, साध्वी प्रमुख कनकप्रभा एवं प्रो. आर पी भटनागर ने भी इस पुस्तक पर अपने विचार प्रकट किये।

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  • Web Title: विज्ञान-अध्यात्म में विरोधाभास नहीं:कलाम