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अहमदाबाद धमाके में 80 के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल

मालेगांव धमाके के सिलिसिले में दक्षिण गुजरात के डांग जिले से धर्म परिवर्तन के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले स्वामी असीमानंद की गिरफ्तारी में मुंबई एटीएस को गुजरात पुलिस के कथित असहयोग के कारण कामयाबी नहीं मिल रही। उलट गुजरात पुलिस ने 26 जुलाई के अहमदाबाद धमाकों के सिलसिले में बुधवार को पहला चार्जशीट दायर किया। इसमें 80 लोगों के नाम हैं। जिन लोगों के नाम आरोप पत्र में शामिल किए गए हैं उनमें 27 की गिरफ्तारी तो हो चुकी है लेकिन 52 फरार हैं। 2000 पन्नों का आरोप पत्र मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट जी एम पटेल की अदालत में दायर किया गया। यह आरोप पत्र सिविल अस्पताल और एलजी अस्पताल में हुए धमाकों से संबंधित हैं। मालेगांल धमाके के सिलिसिले में असीमानंद को मुंबई एटीएस वैसे ढूंढ़ रही है लेकिन बताया जाता है कि एटीएस को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। डांग जिले में तीन सौ के करीब गांव हैं और इन सभी गांवों से असीमानंद को ढूंढ़ निकालना अकेले एटीएस के बूते की बात नहीं। तो फिर क्या मुंबई एटीएस को गुजरात पुलिस का सहयोग नही मिल रहा? इस बाबत पुलिस का कोई अधिकारी से किसी तरह की जानकारी नहीं मिल रही । अलबत्ता पुलिस महानिदेशक पी सी पाण्डे की ओर से पहले ही यह बयान आ चुका है कि हम मुंबई पुलिस को सहयोग कर रहे हैं। राजनीतिक स्तर पर कांग्रेस यह कह रही है कि गुजरात पुलिस एटीएस को सहयोग नहीं कर रही । प्रेक्षकों का कहना है कि असीमानंद को डांग जिले के अनगिनत छोटे-छोटे गांवों से ढूंढ़ निकालना तभी संभव है जब पुलिस सहयोग करगी और यह तभी संभव है जब ऊपर से आदेश आए। असीमानंद की वजह से ही गुजरात में धर्म परिवर्तन के खिलाफ हिन्दूवादी संगठनों की ओर से मुहिम चला था और उनके प्रयास और कथा वाचक मोरारी बापू की परिकल्पना के मुताबिक शबरी कुम्भ का आयोजन किया गया था। इसमें आरएसएस के प्रमुख सुदर्शन से लेकर प्रवीण तोगड़िया और नरंद्र मोदी तक शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री मोदी फिलहाल विभिन्न प्रदेशों में चुनाव को लेकर व्यस्त हैं और एसे में गुजरात पुलिस की ओर से असीमानंद के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की उम्मीद नहीं की जा सकती।

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