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पुरोहित का सहयोगी कानपुर में गिरफ्तार

मुम्बई की एटीएस ने मालेगाँव धमाकों के सिलसिले में बुधवार को कानपुर से सुधाकर द्विवेदी नामक युवक को गिरफ्तार गिया है। उसे गुरुवार को अदालत में पेश कियाोाएँगा। सुधाकर की गिरफ्तारी के एक घंटे बाद ही उसके करीबी चार्टर्ड एकाउंटेंट वीके कपूर व बेटे पवन कोोम्मू के त्रिकुटा नगर से हिरासत में ले लिया गया। मानाोा रहा है कि एटीएस की टीम गुरुवार कोोम्मू पहुँचेगी।ड्ढr महाराष्ट्र आतंकवादी निरोधक दस्ते (एटीएस) के प्रमुख हेमंत करकर ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि कानपुर से पकड़ा गया सुधाकर द्विवेदी उर्फ दयानंद पांडे मालेगाँव धमाके की साािश रचने वाले ग्रुप में शामिल था। सुधाकर के संबंध लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित से भी थे। करकर ने कहा कि एटीएस की टीम न तो गोरखपुर गई है और ना ही उसे यूपी के किसी नेता की तलाश है। एटीएस प्रमुख सुधाकर के बार में यादाोानकारी देने से बचते रहे। लेकिन महाराष्ट्र के डीजीपी एएन राय का कहना है कि सुधाकर स्वयंभू गुरु है।ड्ढr इधर यूपी के एडीाी (कानून-व्यवस्था)ब्रजलाल के मुताबिक सुधाकरोम्मू के शारदा सर्वज्ञ पीठ का स्वामी है और वह अमरनाथोमीन विवाद पर भी आंदोलन कर चुका है। इस पीठ का कैंप आफिस फरीदाबाद (हरियाणा) में है। एटीएस प्रमुख करकर ने खुलासा किया कि इस समय एटीएस सिर्फ मालेगाँव धमाके कीोाँच कर रही है। समझौता एक्सप्रेस मामले कीोाँच फिलहाल नहीं कीोा रही है।ड्ढr सिर्फ एक बार हुआ है प्रज्ञा का नारको टेस्ट : एटीएस पेा 16 13 साल पहले धारण किया था भगवा सव्रेश मिश्र सुनील गुप्त कानपुर मालेगाँव ब्लास्ट मामले में रावतपुर गाँव के पास से हिरासत में लिया गया सुधाकर द्विवेदी उर्फ दयानंद पांडेय यहाँ नवाबगां थाने में तैनात रह चुके दरोगा का बड़ा बेटा है। सुधाकर ने लगभग 13 साल पहले भगवा धारण कर लिया था। वह कभी-कभी यहाँ आता था। दो दिन से एटीएस की टीम सुधाकर की गतिविधियों पर नार रख रही थी।ड्ढr पड़ोसी बताते हैं कि बुधवार दोपहर लगभग दो बो एक स्कार्पियो से कुछ लोग सुधाकर के घर आए और कुछ देर बाद उसे लेकर गाड़ी से चले गए। कुछ समय बाद सुधाकर की माँ, पत्नी और बच्चा मारुति 800 से पीछे-पीछे भागे। उनके पीछे एक टवेरा गाड़ी से सुधाकर के पिता श्रीधर द्विवेदी भी चले गए। बाद में सुधाकर के भाई पुष्कर ने फोन पर ‘हिन्दुस्तान’ को बताया-‘स्कार्पियो से आए लोगों ने खुद को एटीएस का अफसर बताया था। कुछ देर भाई सुधाकर से बात करने के बाद उन्होंने लखनऊ चलने को कहा। पिता के रोकने पर एटीएस टीम ने कहा कि आप लोग भी लखनऊ आएँ। वहाँ बात होगी।’ दो दिन से सुधाकर के घर के आसपास कंबल ओढ़े दो लोग घूम रहे थे। इलाके में एक दुकानदार ने बताया कि सुधाकर और उसके पिता का बहुत अच्छा बर्ताव है। परिवार लगभग 13 साल पहले यहाँ बसा था। उस समय सुधाकर किसी कंपनी में नौकरी करता था। पिता श्रीधर द्विवेदी नवाबगां थाने में दरोगा थे तथा कानपुर देहात में तैनात थे। कुछ साल बाद पिता रिटायर हो गए। सुधाकर भैया पढ़ने में तेा थे। इलाके के कई बच्चे उनसे सवाल और अंग्रेाी पूछनेोाते थे।ड्ढr पड़ोसियों ने बताया कि रावतपुर आने के लगभग तीन साल बाद सुधाकर ने भगवा धारण कर लिया। बाद में कभी-कभी सुधाकर भैया आते थे। तीन दिन पहले ही पिता ने एक दुकानदार सेोल्द ही सुधाकर के आने काोिक्र किया था।

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