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दलों के एजेंडे से चानता का दर्द नदारद

पाँचवें चरण के मतदान वाले इलाकों में चुनावी शोर तेज हो गया है लेकिन सूबे के सबसे बड़े खीरी जिले की संसदीय सीट में जनपद के पिछड़ेपन से जुड़े मुद्दे राजनीतिक पार्टियों के एजेण्डे से नदारद हैं। खस्ताहाल सड़कें, ब्राडगेज की समस्या, बिजली किल्लत, इकलौते नेशनल पार्क दुधवा के विकास की अनदेखी, धौरहरा समेत जिले के कई इलाकों में हर साल होने वाला नदी कटान, बाढ़ और पचपेहड़ी घाट का शारदा पुल समेत तमाम समस्याओं ने जिले को विकास के नाम पर काफी पीछे कर रखा है। ये वो मुद्दे हैं जो बीते कई वर्षो से खीरी की दुखती रग बने हैं, लेकिन इन मुद्दों पर मौजूदा चुनावों में बात ही नहीं हो रही। अब चुनाव प्रचार तेज हो चुका है तो लगरी गाड़ियाँ गाँवों में धूल उड़ा रही हैं। नेताओं की भीड़ जातीय गुणा-भाग के अपने एजेंडे को साधने में जुट गई है। इसमें कोई किसी से पीछे नहीं।ड्ढr खीरी के आसपास के जिलों में अकेले खीरी ही ऐसा जिला बचा है जहाँ अब तक रलवे की बड़ी लाइन नहीं बन पाई। नेताओं ने दावे बहुत किए लेकिन हकीकत में नहीं बदल सके। जिसका असर ये हुआ कि जिले में अब तक कोई बड़ी औद्योगिक इकाई नहीं लगी। लखीमपुर-मैगलगंज व लखीमपुर-निघासन मार्ग समेत कई सड॥कों की खस्ताहाल ससूरत व बिजली की साल भर रहने वाली भारी किल्लत भी यहाँ के लोगों की मुख्य समस्या है।ं

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