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मिल रहे हैं आर्थिक मोर्चे पर अच्छे संकेत

लंबे इंतजार के बाद अब महंगाई निर्णायक रूप से कम होनी शुरू हो गई है। पहली नवंबर को समाप्त हुये सप्ताह के दौरान थोक मूल्यों के आधार पर महंगाई दर अप्रत्याशित रूप से 10.72 फीसदी से घटकर 8.ीसदी पर आ गई। इसकी अहम वजह पेट्रो और कारखानों में बनने वाले उत्पादों के मूल्यों में आई कमी है। इसका आम फायदा यह होगा कि रिार्व बैंक के लिए ब्याज दरों में और कमी करने का रास्ता आसान हो गया है। इससे होम लोन, कार लोन आदि सस्ते हो सकेंगे और आर्थिक विकास की गिरती दर को थामने का सिलसिला शुरू हो सकेगा। कंपनियों के गिरते मुनाफे पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल मूल्यों में कमी के चलते इससे बनने वाले उत्पादों के थोक मूल्यों में खासी कमी आई है। नफ्था के मूल्य 33 फीसदी, हवाई ईंधन यानी एटीएफ का मूल्य 18 फीसदी और फरनेस ऑयल का मूल्य 13 फीसदी, डीाल का मूल्य 6 फीसदी कम हो गया है। स्टील उत्पादन के प्रमुख कच्चे माल ऑयरन ओर का मूल्य 8 फीसदी कम हो गया है। उधर आने वाले दिनों में पेट्रो उत्पादों के मूल्यों में कमी की संभावनायें बढ़ गई हैं। इसकी एक अहम वजह यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का मूल्य कम होकर 52.37 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है। वैसे प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने खाड़ी देशों की यात्रा से लौटते समय हाल ही में कहा था कि पेट्रो उत्पादों के मूल्यों को कम करने में जल्दबाजी से काम नहीं लिया जाएगा क्योंकि रुपये के कमजोर होने से आयात बिल का बोझ अभी भी कंपनियों पर बना हुआ है। सब्सिडी देने की भी एक सीमा हो सकती है। वहीं दूसरी ओर हाल ही में खुद पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने इस बात के संकेत दिये हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरती तेल कीमतों को देखते हुये सरकार निकट भविष्य में इनकी घरलू कीमतें कम करने पर विचार कर सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार अगले कुछ सप्ताह और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुख का जायजा लेगी और इसके बाद इस मामले में कोई अंतिम फैसला करगी। इस बीच रिार्व बैंक ने रुपये में आ रही गिरावट को भी थामने के प्रयास तेज कर दिये हैं। इधर, भारत सहित सात दोस्त देशों के समूह बिम्सटेक में खाद्यान्न कीमतें नियंत्रण में रखने के लिए फूड बैंक बनाने का काम जल्द शुरू होगा। इसमें सभी देश कुछ न कुछ योगदान करंगे और बिमस्टेक के जिस देश में खाद्यान्न का संकट होगा, उसे इसमें से मदद दी जाएगी। बिम्सटेक के यहां गुरुवार को आयोजित दूसर शिखर सम्मेलन में मौजूदा वैश्विक संकट से खुद को बचाने के मसलों पर भी चर्चा की। सम्मेलन में आम भावना यह थी कि अगर आर्थिक सहयोग को तेज किया जाए तो अमीर देशों की मंदी की बीमारी से बचाव हो सकता है। इस बीच भारत ने बिम्सटेक देशों को टेकनीकल कौशल देने के लिए वजीफों की संख्या 300 से बढ़ाकर 450 कर दी है। बिम्सटेक देशों में भारत के अलावा श्रीलंका बंगलादेश, थाईलैंड, म्यांमार, नेपाल और भूटान शामिल हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि हमें अपने सहयोग को रणनीतिक तेजी देनी होगी। इसके लिए हमें मुक्त व्यापार संधि जल्दी करनी चाहिए। यह संधि वस्तुओं के व्यापार के लिए होगी।

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