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चांद पर पहुंचा भारत का तिरंगा

भारत ने अपने मानवरहित अंतरिक्ष यान, चंद्रयान-1 से मून इम्पैक्ट प्रोब (एमआईपी) के जरिए तिरंगे को शुक्रवार को चंद्रमा की सतह पर भेजकर भारतीय अंतरिक्ष इतिहास का स्वर्णिम अध्याय लिख दिया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रवक्ता के सतीश ने बताया कि चंद्रमा की सतह पर एमआईपी भेजने का अभियान भारतीय समयानुसार रात आठ बजकर 34 मिनट पर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। इसके साथ ही भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है। चंद्रयान-1 में लगे 11 पेलोड्स में से एक 2किलोग्राम वजनी एमआईपी में तीन उपकरण लगे हैं जिनमें एक मॉस स्पेक्ट्रोमीटर, एक सी-बैंड अल्टीमीटर और एक वीडियो कैमरा शामिल है। इस ऐतिहासिक क्षण पर मौजूद पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और इसरो के प्रमुख जी माधवन नायर समेत सभी वैज्ञानिकों ने एमआईपी अभियान की सफलता पर एक-दूसरे को बधाई दी। डॉ कलाम ने कहा कि यह मेरे लिए अद्भुत अनुभव है। यह युवा पीढ़ी के लिए बड़ा प्रेरणास्रोत है। अब वे चांद को छूने का सपना देख सकते हैं। डॉ कलाम ने इसरो के सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों को खास तौर पर बधाई दी। इस अवसर पर डॉ नायर ने बताया कि चंद्रमा पर भेजे जाने वाले दूसरे भारतीय अभियान चंद्रयान-2 का नाम ‘आदित्य होगा। नई दिल्ली में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने चन्द्रमा पर खोज करने वाले वैज्ञानिक उपकरण को सफलतापूर्वक चन्द्रमा की सतह पर पहुंचाने के लिए इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी है। राष्ट्रपति ने इसरो के वैज्ञानिकों को भेजे संदेश में कहा है कि इससे भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में नए युग की शुरुआत हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चंद्रमा की सतह पर एमआईपी के जरिए तिरंगा पहुंचने को देश के लिए ऐतिहासिक क्षण बताते हुए इससे जुड़े सभी वैज्ञानिकों को बधाई दी है। गांधी ने अपने बधाई संदेश में कहा कि इस शानदार उपलब्धि के लिए हमें अपने वैज्ञानिकों पर गर्व है।

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