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चाँद पर पहुँचा तिरंगा

भारत ने चंद्रमिशन कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए चंद्रमा पर तिरंगे की उपस्थिति दर्ज करा दी है। शुक्रवार रात 8 बाकर 6 मिनट पर चंद्रयान से एक वैज्ञानिक उपकरण मून इंपेक्ट प्रोब (एमआईपी) को चाँद पर उतारा गया। इसके 25 मिनट बाद 8.31 पर एमआईपी चाँद की सतह से टकराया और भारत ने चंद्रमा पर अपने बूते तिरंगे की हाजिरी दर्ज करा दी। इसरो ने इसे ‘परफैक्ट ऑपरशन’ बताया। सोनिया गांधी ने इस सफलता पर कहा कि हमें देश के वैज्ञानिकों पर गर्व है। इसरो चैयरमैन जी. माधवन नायर ने कहा कि हमने वादे के अनुरूप भारत को चाँद दे दिया है।ड्ढr इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार बंगलुरु स्थित इसरो के टेलीमेंट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क से वैज्ञानिकों ने एमआईपी को चंद्रयान से अलग करके चाँद की तरफ उछाला। तब चंद्रयान 100 किमी की दूरी से चाँद की परिक्रमा कर रहा था। चाँद तक पहुँचने में इसने 25 मिनट लगाए।ड्ढr वैसे चंद्रमा पर भारतीय ध्वज पहले भी पहुँच चुका है। नासा के अपोलो-15 मिशन में जब चौथी बार 26 जुलाई 1ो वैज्ञानिक चाँद की सतह पर उतर तो वे संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी सदस्यों देशों का राष्ट्रीय ध्वज भी ले गए थे। इसमें तिरंगा भी शामिल था। लेकिन इस बार भारत ने यह सफलता अपने बूते हासिल की है। अभी तक अमेरिका, रूस और यूरोपीय यूनियन के बाद भारत चौथा राष्ट्र है जिसने अपना उपकरण चाँद पर पहुँचाया है। अमेरिका पहला देश है जिसने 32 साल पहले अपना झंडा चाँद पर पहुँचाया था। एमआईपी का असली काम चाँद की सतह पर आगामी अभियानों के लिए सुरक्षित लैंडिग स्थान तलाशना और उसके लिए जरूरी प्रौद्योगिकी का पता लगाना है। दूसर यह जिस स्थान पर टकराया है, वहाँ खाइयाँ हैं। सूर्य की किरणें वहाँ नहीं पहुँच पाती हैं।ड्ढr संभावना है कि यदि चाँद पर कहीं बर्फ या पानी के निशान मिल सकते हैं तो वह ऐसी ही अंधकार वाली जगह हो सकती है। एमआईपी ने गिरने के साथ ही चंद्रमा के विभिन्न कोणों से फोटो, चंद्रमा के वातावरण में मौजूद धूलकणों के आँकड़े और चंद्रमा पर दिशा संबंधी जानकारी, चंद्रसतह की वीडियोग्राफी से संबंधित जानकारियां चंद्रयान को भेजीं। जहाँ से यह आँकड़े ब्यालालु में स्थित डीप स्पेस नेटवर्क को पहुँचने शुरू हो गए हैं। यह कार्य एमआईपी में लगे सी बैंड राडार अल्टीमीटर, वीडियो इमेंजिग सिस्टम और स्पेक्टोमीटर के जरिए किए जा रहे हैं। एमआईपी ने क्या-क्या काम की जानकारियाँ भेजीं, इसका खुलासा इसरो द्वारा शनिवार को किए जाने की संभावना है। 2किग्रा के इस उपकरण को इसरो की त्रिवेन्द्रम स्थित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर ने तैयार किया है।

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