DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

शहर में 28 रुपये से अधिक खर्चने वाला अमीर

शहर में 28 रुपये से अधिक खर्चने वाला अमीर

योजना आयोग ने वर्ष 2009-10 में देश में गरीबी का अनुपात घटकर 29.8 प्रतिशत रह जाने का अनुमान जारी करते हुए सोमवार को कहा कि शहरों में 28.65 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में दैनिक 22.42 रुपये से अधिक खर्च करने  वाला व्यक्ति गरीब नहीं है।

गरीबी रेखा के बारे में आयोग के ताजा अनुमान से एक बार फिर सामाजिक  कार्यकर्ताओं की भौंहें तन सकती हैं। गरीबी रेखा के नए फार्मूले के अनुसार शहरों में महीने में 859.60 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 672.80 रुपये से अधिक खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं है। इससे भी बढ़कर बात यह है कि योजना आयोग ने अब गरीबी रेखा सीमा को उच्चतम न्यायालय में सौंपी गई रेखा से भी नीचे रखा है।

योजना आयोग ने इससे पहले उच्चतम न्यायालय में सौंपे शपथपत्र में कहा था जून 2011 के मूल्य स्तर के लिहाज से शहरी क्षेत्रों में गरीबी रेखा को अनंतिम तौर पर प्रति व्यक्ति प्रति माह 965 रुपये (32 रुपये प्रतिदिन) और ग्रामीण क्षेत्रों में 781 रुपये प्रतिमाह यानी 26 रुपये प्रतिदिन रखा जा सकता है।

गरीबी रेखा को लेकर आयोग द्वारा दिए गए इस अनुमान पर तब नागरिक समाज में काफी विरोध हुआ था। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आयोग द्वारा दी गई गरीबी की इस परिभाषा पर सवाल खड़ा किया।

आयोग के आज जारी अनुमान के अनुसार वर्ष 2009-10 में देश में गरीबों की संख्या घटकर 34.47 करोड़ रह गई है जो कि वर्ष 2004-05 में 40 करोड़ 72 लाख पर थी। वर्ष 2004-05 का गरीबी का अनुमान विवादास्पद रही तेंदुलकर समिति की कार्यप्रणाली के अनुसार लगाया गया था। समिति की प्रणाली के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक कैलारी उपभोग पर आने वाले खर्च से गरीबी रेखा का निर्धारण किया गया।

आयोग के आधिकारिक बयान में कहा गया कि अखिल भारतीय गरीबी अनुपात (एचसीआर) 2009-10 में घटकर 29.8 फीसदी था जो 2004-05 में 37.2 फीसदी था। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी का अनुपात आठ फीसदी घटकर 41.8 फीसद की जगह 33.8 फीसदी पर और शहरी इलाकों में गरीबी 4.8 फीसदी घटकर 20.9 फीसदी रह गया जो पांच साल पहले 25.7 फीसदी पर था।

हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओड़िशा, सिक्किम, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तराखंड में गरीबों का अनुपात 10 फीसदी से भी ज्यादा गिरा है। इस दौरान पूर्वोत्तर राज्यों - असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड - में गरीबी बढ़ी है।

बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश जैसे अपेक्षाकृत बड़े राज्यों में गरीबी के अनुपात, विशेष तौर पर ग्रामीण इलाकों में गरीबी में कमी तो आई है पर यह हल्की रही है। धार्मिक समूहों के आधार पर की गई गणना में सिख आबादी में गरीबों का अनुपात ग्रामीण इलाकों में 11.9 फीसदी रहा। ग्रामीण इलाकों में सिखों में अन्य धार्मिक समूहों की तुलना में गरीबो का अनुपात सबसे कम है। शहरी इलाकों में ईसाइयों में गरीबों का अनुपात 12.9 फीसदी रहा जो शहरी इलाकों में अन्य धार्मिक समूहों की तुलना में सबसे कम है।

ग्रामीण इलाके में मुसलमानों में गरीबों का अनुपात जिन राज्यों में सबसे अधिक है उनमें असम (53.6 फीसदी), उत्तर प्रदेश (44.4 फीसदी), पश्चिम बंगाल (34.4 फीसदी) और गुजरात (31.4 फीसदी) शामिल हैं।

शहरी इलाकों में अखिल भारतीय स्तर पर मुसलमानों में गरीबी का अनुपात सबसे अधिक 33.9 फीसदी है। इसी तरह शहरी इलाकों में राजस्थान (29.5 फीसदी), उत्तर प्रदेश (49.5 फीसदी), गुजरात (42.4 फीसदी), बिहार (56.5 फीसदी) और पश्चिम बंगाल (34.9 फीसदी) में मुसलमानों की गरीबी का अनुपात ऊंचा है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:शहर में 28 रुपये से अधिक खर्चने वाला अमीर