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राष्ट्रपति के पास भेजा गया त्रिवेदी का इस्तीफा: PM

राष्ट्रपति के पास भेजा गया त्रिवेदी का इस्तीफा: PM

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को लोकसभा को सूचित किया कि रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी के इस्तीफे को उन्होंने मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को भेज दिया है।
   
सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीती देर रात उन्हें एक ईमेल संदेश मिला जिसके बाद दिनेश त्रिवेदी की तरफ से एक औपचारिक पत्र मिला जिसमें उन्होंने रेल मंत्री पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी।
   
मनमोहन ने बताया कि मैंने उस पत्र को राष्ट्रपति को उनका इस्तीफा स्वीकार करने के लिए भेज दिया है। मुझे त्रिवेदी के जाने का खेद है। प्रधानमंत्री ने कहा कि त्रिवेदी ने एक ऐसा रेल बजट पेश किया जिसमें उनकी पूर्ववर्ती रेल मंत्री द्वारा पेश 2020 के दृष्टिकोण को आगे ले जाने का वादा किया गया था।
  
मनमोहन सिंह ने कहा कि नए रेल मंत्री जल्द ही शपथ लेंगे। उन पर हमारी रेल प्रणाली के आधुनिकीकरण के चुनौतीपूर्ण कार्य को आगे ले जाने की महत्ती जिम्मेदारी होगी।

लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि उन्हें रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी के इस्तीफे की खबर के बारे में यशवंत सिन्हा, गुरुदास दासगुप्ता और वासुदेव आचार्य का नोटिस प्राप्त हुआ है। लेकिन ऐसा कोई नियम नहीं है जिसके तहत इस विषय पर प्रश्नकाल स्थगित कर चर्चा करायी जा सके।

इसके अलावा नियम 388 के तहत इस विषय पर प्रश्नकाल स्थगित करने का नोटिस प्राप्त हुआ है। लेकिन नियम के प्रावधानों के तहत इसे मंजूर नहीं किया जा सकता है। मीरा ने कहा कि लेकिन वह विशेष मामले के तहत कुछ सदस्यों को अपनी बात रखने का मौका देती हैं।
   
यशवंत सिन्हा ने कहा कि देश को आज अप्रत्याशित घटना का सामना करना पड़ रहा है। संसद को आज इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि रेल मंत्री का भविष्य क्या है। सदन जानना चाहता है कि क्या दिनेश त्रिवेदी ने इस्तीफा दिया है। अगर इस्तीफा दिया है तब क्या प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया है।
   
उन्होंने कहा कि यह कोई अप्रत्याशित नहीं है कि कोई मंत्री इस्तीफा दे लेकिन इस विषय पर हमें अखबारों से सूचना मिल रही है। हम सदन के नेता का काफी सम्मान करते हैं लेकिन वह प्रधानमंत्री नहीं है। मंत्रिपरिषद के बारे में बताने का काम प्रधानमंत्री का है। इसलिए प्रधानमंत्री सदन में स्थिति स्पष्ट करें।
   
गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि वह पिछले 33 वर्षों से सदन में हैं लेकिन ऐसी स्थिति कभी नहीं सामने आई जब रेल बजट पेश करने वाले रेल मंत्री को इस तरह से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया हो। प्रधानमंत्री को सदन में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
   
दासगुप्ता ने कहा कि त्रिवेदी का इस्तीफा बड़ा विषय नहीं है। वह किसी दल के प्रतिनिधि हैं, उस दल ने उनसे इस्तीफा देने के लिए कहा और उन्होंने सम्मान के साथ इस्तीफा दे दिया। सवाल गठबंधन सरकार के संचालन का है। क्या इस तरह से देश को अफरातफरी की अवस्था में ढकेला जा सकता है। यह सरकार की कमजोरी को दर्शाता है।

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