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RSS की चेतावनी, अमेरिका के दबाव में ना आए सरकार

RSS की चेतावनी, अमेरिका के दबाव में ना आए सरकार

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) ने सरकार को चेतावनी दी है कि वह यूएन में श्रीलंका के खिलाफ अमेरिकी प्रस्ताव पर दबाव में नहीं आए। संघ ने यूपीए सरकार को आगाह किया है कि अगर वह इस मामले में अमेरिका के दबाव के सामने झुक जाती है, तो भारत भी एक दिन खुद को ऐसे ही कटघरे में खड़ा पा सकता है। इस मामले में संघ का रुख बीजेपी से अलग है।

संघ ने इस मामले में अमेरिका का कड़ा विरोध किया है और कहा है कि पश्चिम ढलान की ओर है। अमेरिका के लिए सही यही होगा कि वह दूसरों के मामलों में हस्तक्षेप करने की बजाय खुद को संभाले। उसने कहा कि श्रीलंका में लिट्टे के सफाया हुए 2 साल हो गए हैं। अमेरिका इतने दिनों बाद 'भर रहे जख्मों को कुरेदने' जा रहा है।

लिट्टे के साथ लड़ाई में श्रीलंकाई तमिलों के खिलाफ वहां की सेना द्वारा किए गए मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ इस महीने जिनीवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद् के सत्र में अमेरिका समर्थित प्रस्ताव पर वोटिंग होनी है।

संघ का श्रीलंका सरकार के समर्थन में यह रुख ऐसे समय आया है जब विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज की अगुवाई में बीजेपी का एक संसदीय दल श्रीलंका जाने वाला है। यह दल लिट्टे के खिलाफ लड़ाई के अंतिम दिनों में वहां के तमिलों के खिलाफ की गई ज्यादतियों का मामला उठाएगा।

संघ के मुखपत्र ऑर्गनाइजर के संपादकीय में श्रीलंका की राजपक्षे सरकार द्वारा मानवाधिकर उल्लंघन करने के अमेरिकी तर्क का विरोध किया गया है। इस संपादकीय में कहा गया है कि खुद लिट्टे ने भी मानवाधिकारों का कम उल्लंघन नहीं किया था। उसने भी तमिलों के साथ कम अत्याचार नहीं किए थे। हालांकि बीजेपी इस मामले में हमेशा से श्रीलंका सरकार के खिलाफ बोलती आई है।

संपादकीय में कहा गया है, 'अमेरिका या किसी यूरोपीय देश को अधिकार नहीं है कि वे ग्लोबल मंच से लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार पर अपनी बातें थोपें या उसे नीचा दिखाए।'

यूपीए सरकार से संघ ने कहा कि वह इस अमेरिकी प्रस्ताव के खिलाफ साफ स्टैंड ले। संघ ने कहा, 'अगर भारत आज ठिठकता है और तटस्थ रुख अपनाता है तो एक दिन वह खुद को कटघरे में खड़ा पाएगा।'

संघ ने कहा, 'यह मजाक ही है कि दुनिया में सबसे अधिक मानवाधिकार उल्लंघन करने वाला अमेरिका श्रीलंका के खिलाफ इस मामले में प्रस्ताव पेश कर रहा है। कोरिया, वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान में इसकी ज्यादतियों का डरावना रेकॉर्ड है।'

हालांकि संघ ने लिट्टे को भी निशाने पर लिया है। उसने कहा है कि राजीव गांधी समेत जिस नेता ने भी लिट्टे प्रमुख वी. प्रभाकरण के खिलाफ बोला उसका उसके वफादार दस्ते ने सफाया कर दिया। इसमें कहा गया कि प्रभाकरण 12-13 साल के छोटे-छोटे बच्चों को अपनी सेना में शामिल करता था, क्या यह सब मानवाधिकार उल्लंघन नहीं था।

 

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