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झारखंड आठ साल-आठ सच

अस्थिरताड्ढr आठ साल में पांच सरकारें। राजनैतिक अस्थिरता का सबसे बड़ा उदाहरण। पिछड़ने की एक बड़ी वजह। बुनियाद से अब तक निर्दलीयों-छोटे दलों की ही सत्ता में रही चांदी। 2005 के चुनाव में भी किसी दल या घटक को नहीं मिला बहुमत। बड़े दल बौने हुए। निर्दलीयों की ब्लैकमेलिंग से सरकारं गिरती रहीं, बनती रहीं। उग्रवादड्ढr आज उग्रवाद सबसे बड़ी चुनौती है। सांसद सुनील महतो, विधायक महेन्द्र सिंह, रमेश सिंह मुंडा, डीएसपी प्रमोद कुमार रवि...हत्या और शहादत की लंबी सूची। आज 24 जिले के झारखंड में ज्यादातर उग्रवाद प्रभावित हैं। विकास की राशि लेवी की भेंट चढ़ रही। इसके सफाये के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ित की कमी खली।ड्ढr भ्रष्टाचारड्ढr एक सच, जिसने जीवन के हर क्षेत्र को जकड़ा। आला से लेकर अदना तक इसमें फंसा। हर दिन नया किस्सा। कभी विदेशी बैंक में खाते और निवेश की बात, तो कभी करोड़ों का बैंक्वेट हॉल सुर्खियां बना। सोने की ईंट से लेकर रुपया गिनने की मशीन खरीदने तक के किस्से सामने आये। सभी हदें टूटीं। उद्यमड्ढr अकूत खनिज संपदा के ढेर पर बैठे सूबे में औद्योगिक विकास की संभावनाएं बार-बार अंगड़ाई लेती हैं- पर कभी हुक्मरानों की बेरुखी, तो कभी नीति और नीयत के फासले की वजह से दम तोड़ देती हैं। मित्तल, जिंदल, रिलायंस जसे शीर्ष घरानों ने संभावनाओं के द्वार पर दस्तक तो दी, लेकिन बात कागज से सरामीं पर नहीं उतरी।ड्ढr भुखमरीड्ढr ख्वाहिशों के पर होने चाहिए, सपने साकार होते हैं। लेकिन यथार्थ का क्या?. एक ओर चांद पर लहराते तिरंगे का रोमांचकारी एहसास और दूसरी ओर भूख से बिलबिलाकर दम तोड़ते बैगा-बिरहोर! अकूत संसाधनों से लबरा विजयोन्माद तो दूसरी ओर दाने-दाने को मोहताज एक आदि संस्कृति। कचोटती नहीं यह विडंबना?.ड्ढr नरगाड्ढr इस आठ बरस में बहुत कुछ बना। नगरों की चौड़ी सड़कें, अट्टालिकाओं का पसरता महाजाल। रोशनी से नहाती, रंगीन होती शामें। काली रातें भाग खड़ी हुईं। कभी सोचा, गयी कहां?. पनाह मिला उसे तापस-ललित के नरगा वाले गावों में! भूल गये, तापस सोरन का आत्मदाह!. याद नहीं, ललित मेहता की नृशंस हत्या?ड्ढr प्रतिभाड्ढr चट्टानी हौसलों की जमीन चीर झारखंडी संततियों ने देश को डाला हैरत में। क्रिकेट के दोनों संस्करणों में धोनी का जलवा, डॉ महुआ माजी और डॉ रामदयाल मुंडा ने अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीते, सौरभ तिवारी की राष्ट्रीय क्रिकेट में दस्तक हुई, आलीशा और दीपक तिर्की संगीत की दुनिया में छा गये। हुआ न कमाल।ड्ढr उम्मीदड्ढr लाख खलिश हो, सपने नहीं मरते। कर्मचेतना के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है झारखंड। बदलाव और सुखद उम्मीदों की बांह पकड़े। रात का अंधेरा छंटेगा, सुबह का उाियारा नयी उाास के साथ इसकी माटी की सोंधी गंध महसूसेगा। खेतों की पकती बालियों, सुदूर गांव के सुगना को भी है नयी सुबह का इंतजार।

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