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त्रिवेदी ने दिया रेल मंत्री पद से इस्तीफा

त्रिवेदी ने दिया रेल मंत्री पद से इस्तीफा

दिनेश त्रिवेदी ने अवज्ञाकारी रवैया खत्म करते हुए रविवार की रात अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की मांग मानते हुए रेल मंत्री के पद से त्यागपत्र दे दिया। त्रिवेदी ने इसके साथ ही रेल बजट में यात्री किराया बढ़ाने को लेकर अपनी पार्टी की नाराजगी के बाद पांच दिन से जारी नाटक पर भी विराम लगा दिया।

61 वर्षीय त्रिवेदी ने कल इस बात पर जोर दिया था कि वह तब तक त्यागपत्र नहीं देंगे जब तक तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी उन्हें यह निर्देश लिखित रूप में नहीं देती हैं। उन्होंने दिल्ली में संवाद्दाताओं से कहा कि उन्होंने स्थिति की पुष्टि करने के लिए उन्हें फोन किया।

उन्होंने कहा कि ममता ने मुझसे कहा कि यह पार्टी का निर्णय है कि मुझे पद छोड़ देना चाहिए और चूंकि तृणमूल कांग्रेस मुझे रेल मंत्री बनाने में सहायक थी और ममता बनर्जी के निर्देश काफी स्पष्ट थे कि यह निर्णय पार्टी ने किया है और एक कार्यकर्ता के रूप में मुझे पार्टी अनुशासन का पालन करना चाहिए। मुझे इसी तरह से प्रशिक्षण मिला है।

ऐसा समझा जाता है कि त्रिवेदी का यह निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से उन्हें पद छोड़ने के लिए निर्देश के बाद आया है। कांग्रेस नेतृत्व और प्रधानमंत्री ने ममता को भरोसा दिया था कि त्रिवेदी को बदलने की उनकी मांग गत शुक्रवार को आम बजट पेश किये जाने के बाद मानी जाएगी।

कोलकाता में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि त्रिवेदी ने उन्हें फोन करके बताया कि वह त्यागपत्र दे रहे हैं। ममता ने दिल्ली रवाना होने से पहले कहा कि उन्होंने (त्रिवेदी) मुझे फोन किया और मुझे बताया कि वह पार्टी के निर्णय का पालन करेंगे और अपना त्यागपत्र भेज देंगे। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि त्रिवेदी ने उन्हें बताया कि वह पार्टी के साथ ही रहेंगे।

त्रिवेदी ने कहा कि मुझे यह मौका देने के लिए पार्टी नेता ममता बनर्जी, पूरे कैबिनेट और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंहजी को धन्यवाद देना चाहिए। उन्होंने कहा कि रेलवे और देश के हित के लिए मैं जो कुछ थोड़ा कर सकता था मैंने उसके लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया। मुझे इस बात की बहुत प्रसन्नता है। मैं इस अवसर पर रेलवे बोर्ड और रेल परिवार के 14 लाख कर्मचारियों के प्रति आभार जताता हूं।

उन्होंने कहा कि लोगों को इस बात को सुनिश्चित करना चाहिए कि रेलवे अच्छी स्थिति में रहे। मैं सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हूं और मैंने जो कुछ भी किया वह सुरक्षा के लिए किया। त्रिवेदी का निर्णय एंटी क्लाइमैक्स के रूप में सामने आया है क्योंकि उन्होंने गत पांच दिन से कड़ी अवज्ञा दिखाते हुए अपना पद तब तक छोड़ने से इनकार कर दिया था जब तक कि ममता यह लिखित में नहीं देतीं।

त्रिवेदी ने आज दोपहर में भी कहा कि बजट को पारित कराना उनका संवैधानिक कर्तव्य है जो उन्होंने संसद में पेश किया था। बजट में रेल यात्री किराये में वृद्धि से नाराज ममता ने बुधवार रात को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर मांग की कि त्रिवेदी को हटाकर उनके स्थान पर पार्टी के अन्य मनोनीत सदस्य जहाजरानी मंत्री मुकुल राय को रेल मंत्री बनायें।

ममता की ओर से दबाव बढ़ाये जाने के बाद प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें भरोसा दिया कि त्रिवेदी को गत शुक्रवार को आम बजट पेश किये जाने के कुछ दिनों बाद बदल दिया जाएगा।

अमेरिका से शिक्षा प्राप्त करने वाले एवं लोकसभा में बैरकपुर संसदीय क्षेत्र का नेतृत्व करने वाले त्रिवेदी कल रेल भवन भी गए थे और उन्होंने संसद में रेल बजट पर जवाब के सिलसिले में वहां पर बोर्ड सदस्यों की एक बैठक की अध्यक्षता भी की।

लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस पार्टी के मुख्य सचेतक कल्याण बनर्जी ने त्रिवेदी को टेलीफोन पर मंत्री पद से त्यागपत्र देने का कहा था, उन्होंने बनर्जी से कहा कि वह ऐसा तब तक नहीं करेंगे जब तक कि यह निर्देश ममता की ओर से लिखित रूप में नहीं आता।

त्रिवेदी के त्यागपत्र नहीं दिये जाने पर ममता ने तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आने का फैसला किया जिसमें त्रिवेदी को इस्तीफा देने का निर्देश संबंधी प्रस्ताव पारित होने की संभावना थी। यह बैठक कल होगी।

ममता ने इसके साथ ही इस यात्रा का प्रयोग प्रधानमंत्री से मुलाकात करने और उनसे एनसीटीसी पर आगे नहीं बढ़ने को लेकर उनकी पार्टी की चिंताओं पर ध्यान देने का अनुरोध का निर्णय किया। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि पार्टी उम्मीद करती है कि कांग्रेस नेतृत्व त्रिवेदी को हटाने पर अपने वचन पर कायम रहेगा।

दिन में त्रिवेदी ने अपने आवास के बाहर संवाददाताओं से कहा कि मैं अपने मंत्रालय से चिपके रहना नहीं चाहता लेकिन वहां से भागना भी नहीं चाहता। प्रधानमंत्री को उस पर (त्यागपत्र) निर्णय करना है। मंत्रालय में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। रेलवे किसी की जागीर नहीं है।

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