अनाज के वितरण को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिये - अनाज के वितरण को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिये DA Image
18 नबम्बर, 2019|3:08|IST

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अनाज के वितरण को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिये

राशन की दुकान के वे संचालनकर्ता- (क) जो अपनी दुकानें पूर माह निर्धारित समय तक न खोलते हों, (ख) गरीबी रखा के नीचे आने वाले परिवारों को उनके लिए निर्धारित दरों पर अनाज उपलब्ध न करवाते हों, (ग) बीपीएल परिवारों के कार्ड पास रखते हों, (घ) बीपीएल कार्ड में गलत सूचना भरते हों, (ङ) राशन के अनाज को खुले बाजार में बेचते हों या उन लोगों को बेचते हों, जो बीपीएल सूची के बाहर हों और राशन की दुकानों, दूसर व्यक्ितयों, संस्थाओं को चलाने के लिए देते हों, उनका लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए। संबंधित अधिकारी इसमें ढिलाई नहीं देंगे।ड्ढr गरीबी रखा से नीचे आने वाले परिवारों को अपने हिस्से का सामान किस्तों में खरीदने की अनुमति होगी।ड्ढr इस आदेश को बड़े स्तर पर प्रसारित किया जाये, ताकि बीपीएल परिवार अनाज के अपने अधिकार के बार में जान सकें। 23 जुलाई 2001 के आदेश में गरीब, लाचार व विकलांग व्यक्ित भी अंत्योदय अन्न योजना कार्ड के हकदार हैं। भारत सरकार को निर्देशित किया जाता है कि वे निम्न श्रेणियों के व्यक्ितयों को भी अंत्योदय अन्न योजना में शामिल करं :ड्ढr बूढ़े, लाचार, विकलांग, बेसहारा पुरुष व महिलाएं, गर्भवती महिलाएं व बच्चों को दूध पिलाने वाली माताएंड्ढr विधवा व वे एकल महिलाएं जिनका कोई सहारा नहीं है 60 साल व उससे ऊपर के व्यक्ित जो बेसहारा हैं व जिनके पास आजीविका का कोई नियमित जरिया नहीं है वे परिवार जिनमें कोई विकलांग व्यक्ित है ऐसा परिवार जहां वृद्धावस्था, शारीरिक व मानसिक बीमारी, सामाजिक रीति-रिवाजों, विकलांग व्यक्ित को देखभाल तथा अन्य किन्हीं वजहों से कोई ऐसा व्यक्ित नहीं हो जो घर के बाहर कमाई के लिए जा सके आदिम जनजातियां। (ाारी )ड्ढr लेखक : सुप्रीम कोर्ट कमिश्नर के राज्य सलाहकार हैं।

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